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    Meerut : पाकिस्तान की कारीगरी फेल, ड्यूक्स बॉल ने खो दी धार, सवाल उठे तो मेरठ में बनाने का हुआ फैसला

    Updated: Mon, 14 Jul 2025 07:29 PM (IST)

    Meerut News मेरठ के खेल उत्पादों ने एक बार फिर अपना लोहा मनवाया है। भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में ड्यूक्स की गेंद की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद कंपनी ने मेरठ की ओर रूख किया है। 2018 में पाकिस्तान जाने के बाद ड्यूक्स की गेंद कमजोर हुई। कंपनी के संचालक दिलीप जाजोडिया मेरठ में फिर से अपनी यूनिट खोलेंगे।

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    मेरठ में ड्यूक्स बाल बनाने का हुआ फैसला। सौ. इंटरनेट मीडिया

    अमित तिवारी, मेरठ। क्रिकेट के गेंद, बल्ले, हेल्मेट और अन्य उपकरणों में मेरठ की हाथ की कारीगरी एक बार फिर दुनिया में बेजोड़ साबित हुई। इंग्लैंड-भारत टेस्ट क्रिकेट सीरीज (India-England Test Series) में ड्यूक्स की गेंद की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आई तो कंपनी ने फिर मेरठ की ओर देखा।

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    मेरठ में 30 वर्षों तक बनी ड्यूक्स की गेंद

    वर्ष 2018 में मेरठ से पाकिस्तान शिफ्ट होने के बाद डयूक्स की गेंद अपनी धार खोने लगी। डयूक्स गेंद बनाने वाली कंपनी के संचालक दिलीप जाजोडिया मेरठ में नए सिरे से यूनिट डालेंगे। क्रिकेट उपकरण निर्माता कंपनी एसएफ के संचालक अनिल सरीन के अनुसार करीब 30 वर्षों तक ड्यूक्स की गेंद उनकी कंपनी ने ही बनाया। इसके लिए पशुओं के कमर के हिस्से का चमड़ा इंग्लैंड से आता था।

    2018 के बाद कंपनी हुई पाकिस्तान शिफ्ट

    वर्ष 2018 के बाद ड्यूक्स की गेंद बनवाने वाली कंपनी पाकिस्तान शिफ्ट हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की कारीगरी मेरठ के मुकाबले ठहरती नहीं, वहीं कई गेंदों में खराब चमड़ा लगाने की भी बातें चर्चा में आई थीं।

    एसजी के मार्केटिंग मैनेजर पारस आनंद कहते हैं कि पिचों एवं परिस्थितियों को देखकर गेंदों का फिनिश करते हैं, इसीलिए एसजी में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान देती है। खिलाड़ियों से मिले फीडबैक पर समय-समय पर गुणवत्ता में सुधार भी किया गया है।

    बताया कि पहले स्पिन गेंदबाज अधिक विकेट लेते थे जिससे गेंद अधिक चलती थी। अब तेज गेंदबाज अधिक विकेट लेने लगे हैं जिसका असर गेंद पर ही पड़ रहा है।

    यह बोले, पूर्व अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज प्रवीण कुमार

    तीनों तरह की गेंद से खेल चुके पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर गेंदबाज प्रवीण कुमार (Former Cricketer Praveen Kumar) ने कहा कि डयूक्स ही नहीं, हर कंपनी के साथ ऐसा हुआ है। कंपनी भारतीय हो या विदेशी। ऐसा गेंद की डिमांड ज्यादा होने पर होता है।

    सप्लाई पूरी करने के फेर में कभी-कभी खराब गुणवत्ता का चमड़ा इस्तेमाल कर दिया जाता है। कहा कि क्रिकेट भी बदला है। पिच फ्लैट हुई है। ग्रासी पिच पर गेंद अधिक समय पर चलती है। इन बदलावों का असर भी गेंद पर पड़ रहा है।

    ये हैं गेंदों से जुड़े खास बिंदु

    एसजी की गेंद भारत की है। 1991 से टेस्ट क्रिकेट में मान्यता प्राप्त है। भारत के साथ बांग्लादेश में भी इस्तेमाल। l कूकाबुरा की गेंद आस्ट्रेलिया की है। आस्ट्रेलिया सहित दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड श्रीलंका में इस्तेमाल होती है। l ड्यूक की गेंद इंग्लैंड की है। इंग्लैंड सहित वेस्ट इंडीज और पाकिस्तान में टेस्ट क्रिकेट में इस्तेमाल होती है।

    ये है गेंदों में अंतर

    एसजी की गेंद (SG balls) की सीम मोटी होती है। इसकी चमक 70 ओवर बाद भी बरकरार रहती है, ऐसे में सीमरों एवं स्पिनरों को पूरी ग्रिप मिलती है। आस्ट्रेलिया में बनने वाली कूकाबुरा (Kookaburra cricket balls) की सीम पतली होती है। चमक 20 ओवर के बाद कम हो जाती है। ड्यूक्स की गेंद हस्तनिर्मित होती है। इसकी सीम उभरी हुई होती है। गेंदबाज लंबे समय तक स्विंग कर पाते हैं। 

    एसजी गेंद को गेंदबाज एक तरफ चमकाकर रिवर्स स्विंग के लायक बना लेता है, जबकि कूकाबुरा गेंद से यह नहीं हो पाता है। 

    ड्यूक्स में गेंदबाज को शुरुआती और रिवर्स स्विंग में अधिक लाभ मिलता है. सीमिंग परिस्थितियों में बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण गेंद मानी जाती है। चमड़े के मानक पर एसजी गेंद काफी बेहतर है। एसजी की गेंद से स्पिनर व पेसर मनचाहा घुमाव हासिल करते हैं।