आठ बार लगातार चुने गए एमएलसी, जीत का बनाया अनूठा रिकार्ड... ऐसे थे शिक्षक नेता ओपी शर्मा
शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा, जिन्हें शिक्षकों का भीष्म पितामह कहा जाता था, कि 5 जनवरी को 93वीं जयंती है। उन्होंने मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगाता ...और पढ़ें

शिक्षक नेता ओपी शर्मा (मध्य में)। जागरण आर्काइव
जागरण संवाददाता, मेरठ। उत्तर प्रदेश में मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार आठ बार एमएलसी रहकर शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा ने खास रिकार्ड बनाया था। शिक्षकहितों के लिए किए गए संघर्ष और कार्यों के कारण वे शिक्षकों के भीष्म पितामह भी कहलाए। 5 जनवरी को उनकी 93वीं जयंती है।
ओमप्रकाश शर्मा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा नाम हैं, जो शिक्षक आंदोलन, शिक्षा सुधार और विधान परिषद की गरिमा के प्रतीक माने जाते रहे हैं। उन्होंने लगभग पांच दशकों तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य के रूप में सेवाकर एक दुर्लभ कीर्तिमान स्थापित किया। उनका संपूर्ण राजनीतिक जीवन शिक्षा और शिक्षक हितों को समर्पित रहा।
सूजती बागपत में जन्मे थे ओपी शर्मा
ओमप्रकाश शर्मा का जन्म 5 जनवरी 1933 को ग्राम सूजती मेरठ, अब बागपत में हुआ था। जनता इंटर कालेज, खरखौदा मेरठ में अंग्रेजी के प्रवक्ता रहे। वे मूलरूप से शिक्षक पृष्ठभूमि से जुड़े थे और प्रारंभ से ही शिक्षकों की समस्याओं, उनके अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष करते रहे। इसी कारण वे शिक्षक समाज में अत्यंत लोकप्रिय रहे। उनकी पहचान एक सादगीपूर्ण, अनुशासित और सिद्धांतनिष्ठ नेता के रूप में बनी।
पहली बार मेरठ-सहारनपुर सीट से चुने गए एमएलसी
ओमप्रकाश शर्मा वर्ष 1972 में पहली बार मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए। इसके बाद वे लगातार लगभग 48 वर्षों तक आठ बार एमएलसी रहे। यह अवधि उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विधान परिषद सदस्य के रूप में स्थापित करती है। वर्ष 2020 में पहली बार उन्हें चुनावी पराजय का सामना करना पड़ा।
शिक्षक हितों के लिए रहा अहम योगदान
ओमप्रकाश शर्मा का संपूर्ण राजनीतिक जीवन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने विधान परिषद में बार-बार यह मुद्दे उठाए।
-शिक्षकों के वेतनमान और भत्तों में सुधार
-समय पर वेतन भुगतान
-सेवा सुरक्षा और पेंशन संबंधी समस्याएं
-शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता
-चयन बोर्डों की कार्यप्रणाली में सुधार
-शिक्षा के निजीकरण का विरोध किया
-सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों की मजबूती
शिक्षा व्यवस्था में रही अहम भूमिका
ओमप्रकाश शर्मा का मानना था कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत समाज की नींव होती है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी और गिरते शैक्षिक स्तर जैसे विषयों को गंभीरता से सदन में रखा। वे शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा मानते थे।
विधान परिषद में अस्थायी सभापति की संभाली थी जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के मंडलीय अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा का कहना है कि अपनी वरिष्ठता, अनुभव और निष्पक्षता के कारण उन्होंने अस्थायी सभापति (Pro-tem Chairman) के रूप में भी कार्य किया। उनके भाषण संयमित, तथ्यपूर्ण और विषय केंद्रित होते थे, जिससे सदन की गरिमा बनी रहती थी।
निधन और विरासत
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गजेंद्र वर्मा व जिला मंत्री डा. राजेश कुमार शर्मा का कहना है कि गत 16 जनवरी 2021 को उनका निधन हो गया। उनके निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति, विशेषकर शिक्षक समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची। वे आज भी शिक्षक राजनीति के भीष्म पितामह के रूप में स्मरण किए जाते हैं।
जनता इंटर कालेज खरखौदा में प्रवक्ता व उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के संयुक्त मंत्री केडी शुक्ला का कहना है कि ओमप्रकाश शर्मा केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे शिक्षकों की आवाज, शिक्षा के सच्चे सेवक और लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है कि राजनीति को सेवा, संयम और सिद्धांतों के साथ कैसे जिया जाए।

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