रुड़की में गंगनहर में गिरी कार, कुराली के दो युवकों की मौत...गांव में पसरा मातम
रुड़की में हुए दर्दनाक हादसे में मेरठ के कुराली गांव के दो युवक, आयुष और सौरभ, कार गंगनहर में गिरने से मारे गए। यह खबर मिलते ही पूरे गांव में गहरा मात ...और पढ़ें

सौरभ के घर पर गमजदा महिलाएं व आयुष उर्फ पुनीत और सौरभ। (फाइल फोटो)
संवाद सूत्र, जागरण जानी खुर्द (मेरठ)। उत्तराखंड के रुड़की में शनिवार देररात हुए दर्दनाक हादसे में कुराली गांव निवासी दो युवकों की मौत की सूचना मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। रविवार को दिन निकलते ही जैसे ही यह दुखद समाचार ग्रामीणों को मिला, पलभर में गांव का माहौल गमगीन हो गया और हर आंख नम हो गईं। उधर, घटना की जानकारी मिलते ही गांव के मुख्य बाजार में व्यापारियों ने स्वयं ही अपनी दुकानें बंद कर दीं। बाजार की चहल-पहल देखते ही देखते सन्नाटे में बदल गई। लोग एक-दूसरे से बस यही पूछते नजर आए कि आखिर इतनी बड़ी अनहोनी कैसे हो गई।
कुराली गांव निवासी 23 वर्षीय आयुष उर्फ पुनीत पुत्र आशुतोष उत्तराखंड के जिला रुड़की में नौकरी करते थे। कुछ समय पूर्व बीमार होने पर आयुष ने अपना स्थानांतरण मेरठ में करा लिया था। शनिवार को आयुष गांव निवासी अपने दोस्त 24 वर्षीय सौरभ पुत्र राजकुमार उर्फ राजू के साथ कार से रुड़की में कमरे से अपना सामान लेने के लिए गए थे, लेकिन लौटते समय वहां पर गंगनहर में कार गिरने के चलते दोनों की मौत हो गई।।
विवेक ने बताया कि रात साढ़े ग्यारह बजे रुड़की थाना पुलिस का फोन आया। जिस पर उन्हें जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इससे पहले साढ़े दस बजे उसके छोटे भाई सौरभ ने फोन कर बताया था कि वह यहां से सामान लेकर घर के लिए चल दिए हैं। जिसके बाद स्वजन में कोहराम मच गया और वह मौके पर निकल पड़े।
आयुष अपने घर का था चिराग, सौरभ एमआइइटी कालेज से कर रहा था एमबीए
ग्रामीणों ने बताया कि आयुष उर्फ पुनीत अपने घर का चिराग था। उसके बड़ी बहन अंजलि है और पिता आशुतोष किसान है। वहीं सौरभ मेरठ के एमआइइटी कालेज में एमबीए का छात्र था। बडा भाई विवेक निजी कंपनी में नौकरी करता है और पिता राजकुमार उर्फ राजू बिजली मैकेनिक है।
मेरा बेटा सामान लेने गया था… सौरभ की मां का रो-रोकर बुरा हाल
कुराली गांव के दो युवकों की रुड़की में हुई दर्दनाक मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। इस हृदयविदारक हादसे से हर कोई सदमे में है। विलाप के दौरान मां सुषमा बार-बार यही कहतीं रहीं कि मेरा बेटा सौरभ तो अपने दोस्त का सामान लेने के लिए गया था। वहां से चलते समय उसने फोन कर जल्दी आने की बात कही थी, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि फोन पर बातचीत उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी। वह हर बार काम निपटाकर तुरंत घर लौट आता था। उस रात भी यही भरोसा था कि सौरभ थोड़ी देर में दरवाजे पर दस्तक देगा। लेकिन देर रात पुलिस की सूचना ने पूरे परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी।
शाम को गांव में पहुंचे सौरभ व आयुष के शव
जानी खुर्द। कुराली गांव में रविवार शाम उस समय मातम छा गया। जब एक साथ दो युवक सौरभ और आयुष के शव गांव पहुंचे। तभी स्वजन का सब्र टूट गया और मां-बाप, भाई-बहन और अन्य शवों से लिपटकर दहाड़े मार-मारकर रोने लगे। करुण चीत्कारों से पूरा गांव गूंज उठा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर ग्रामीण की आंखें छलक आईं और कलेजा मुंह को आ गया।
सौरभ और आयुष की शव यात्रा जब गांव की गलियों से गुजरी तो हर कदम पर ग्रामीण नम आंखों से अंतिम दर्शन करते नजर आए। भारी संख्या में ग्रामीण शव यात्रा में शामिल हुए। किसी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। इसके बाद गांव में स्थित श्मशान घाट में गमगीन माहाैल में दोनों के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हर जुबान पर बस यही सवाल था कि हंसते-खेलते युवकों को आखिर किसकी नजर लग गई।
नहीं जले चूल्हे, ग्रामीण स्वजन को देते रहे सांत्वना
कुराली गांव में सौरभ और आयुष की असमय मौत के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल बना रहा। रविवार को कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। स्वजन गहरे सदमे में थे। ग्रामीण अपने-अपने काम छोड़कर पीड़ित परिवारों के यहां पहुंचते रहे और उन्हें ढांढस बांधते रहे। कोई आंसू पोछते हुए सांत्वना देता दिखा तो कोई परिवार के बुजुर्गों के पास बैठकर उन्हें संभालने की कोशिश करता नजर आया।

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