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    Meerut : 30 साल के कलक्ट्रेट कर्मी को 12 घंटे में दो बार पड़ा दिल का दौरा, सीने में हुआ असहनीय दर्द, मौत

    Updated: Tue, 15 Jul 2025 03:11 PM (IST)

    Meerut News मेरठ कलक्ट्रेट में तैनात वरिष्ठ लिपिक ईशांत सिंह का ह्रदयाघात से निधन हो गया। उन्हें 12 घंटे में दो बार दिल का दौरा पड़ा। सीने में दर्द होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया था जहां से उन्हें नार्मल बताकर वापस भेज दिया गया। सोमवार सुबह फिर से दर्द हुआ और अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।

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    कलक्ट्रेट कर्मी ईशांत सिंह का फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। कलक्ट्रेट के ईआरके (इंग्लिश रिकार्ड कीपर) अनुभाग में तैनात वरिष्ठ लिपिक 29 वर्षीय ईशांत सिंह की सोमवार सुबह ह्रदयाघात से मृत्यु हो गई। उन्हें 12 घंटे में दो बार दिल का दौरा पड़ा। डीएम समेत सभी अधिकारियों ने तहसील परिसर स्थित आवास पर पहुंचकर शोक जताया।

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    माता के निधन के बाद हुई थी नियुक्ति

    माता के निधन के बाद ईशांत सिंह की नियुक्ति मृतकाश्रित कोटे में हुई थी। पिता की भी मृत्यु हो चुकी है। पांच साल पहले ईशांत की शादी हुई थी। 22 जुलाई को उनका 30वां जन्मदिन था। परिवार में अब केवल उनकी पत्नी हैं। एक बहन है जो विवाहित है।

    कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ में वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईशांत सदर तहसील परिसर स्थित सरकारी आवास में रहते थे। साथी कर्मचारियों ने बताया कि ईशांत को रविवार रात सीने में दर्द होने पर अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने उनकी जांच की, टेस्ट कराए और नार्मल बताकर वापस भेज दिया।

    सोमवार सुबह छह बजे बाथरूम में नहाते समय उन्हें फिर से सीने में असहनीय दर्द उठा और जमीन पर गिर गए। पत्नी ने कर्मचारियों की मदद से बाथरूम का दरवाजा खुलवाया और अस्पताल ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    दोपहर में सूरजकुंड श्मशान में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कलक्ट्रेट और तहसीलों के कर्मचारियों समेत सभी एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एसीएम मौजूद रहे।

    कार्डियक अरेस्ट का हो सकता है मामला : डा. ममतेश गुप्ता

    वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. ममतेश गुप्ता का कहना है कि जिस तरह की स्थिति बनी... उससे यह कार्डियक अरेस्ट का मामला लगता है। कार्डियक अरेस्ट में अचानक दिल की धड़कन बंद हो जाती है, जबकि हार्ट अटैक में दिल की नस में रक्त का प्रवाह अवरूद्ध हो जाता है।

    हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों ही मामले बढ़ रहे हैं। बचाव के लिए 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को अपनी दिल से संबंधित जांचे करानी चाहिए।

    ईको, ईसीजी की जांच साल में एक बार जरूर कराएं। शुगर-बीपी के मरीज हैं तो ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।

    घर के हर व्यक्ति को सीपीआर देना आना चाहिए। कार्डियक अरेस्ट में सीपीआर देकर दिल की धड़कन वापस लाने का प्रयास किया जाता है। यदि समय से मिल जाए तो जान बच सकती है। सीपीआर यानी कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दोनों हाथ की हथेली से छाती को दबाया जाता है।