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    मेरठ की इस स्पेशल मिठाई को मिली वैश्विक पहचान, मिला जीआई टैग; 121 साल पुराना है कारोबार

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 07:32 AM (IST)

    मेरठ की 121 साल पुरानी गजक को अब जियोग्राफिक आइडेंटिफिकेशन (जीआई) टैग मिल गया है। यह उपलब्धि मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों और ...और पढ़ें

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    मेरठ की गजक को मिली वैश्विक पहचान, मिला जीआई टैग

    जागरण संवाददाता, मेरठ। मेरठ की गजक का स्वाद और सुगंध देश में ही नहीं विदेशों में फैली है। इसके प्रसिद्धि की कड़ी में बुधवार को एक और उपलब्धि जुड़ गई। मेरठ के 121 साल पुराने इस उत्पाद को जियोग्राफिक आइडेंटीफिकेशन टैग मिल गया है।

    मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन ने चेन्नई स्थित संस्था में इसके लिए आवेदन किया गया था। जीआइ टैग मिलने से मेरठ के गजक निर्माता उत्साहित हैं। अध्यक्ष वरुण गुप्ता ने बताया कि 10 हजार से अधिक लोगों की आजीविका इससे सीधी जुड़ी है।

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    इस उपलब्धि को मिलने के पीछे जीआई मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. रजनीकांत का भी सहयोग रहा है। संस्था के महामंत्री बंगाल स्वीट हाउस के संचालक समीर थापर ने बताया कि जीआई टैग मिलने से विश्व में गूगल पर कोई भी गजक रेवड़ी टाइप करेगा तो मेरठ का नाम आएगा।

    इससे मेरठ गजक रेवड़ी निर्माताओं की पहुंच पूरे विश्व में हो सकेगी। व्यापार में वृद्धि होगी। मेरठ में लगभग चार से पांच माह चलने वाला यह कारोबार 50 से 60 करोड़ रुपये का है। मेरठ में रेवड़ी गजक का निर्माण करने वाली 35 फर्म हैं।

    121 साल पुरानी है परंपरा

    1904 की बात है जब लाला रामचंद्र की गुदड़ी बाजार स्थित दुकान में तिल बुग्गा तैयार करने के लिए सफेद तिल एक पात्र में रखे हुए थे। इसी बीच कारीगर चिक्की बनाने के लिए कढ़ाई में गुड़ गरम कर रहे थे। कढ़ाई से गरम गुड़ दूसरे पात्र में डालते समय गलती से उसमें गिर गया जिसमें तिल रखा हुआ था।

    लाला जी ने जब देखा तो काफी नाराज हुए। उन्होने इतना माल बर्बाद न हो इसके लिए कारीगर से तिल मिले गुड़ से कुछ बनाने के लिए कहा। दो तीन घंटे की मेहनत के बाद रेवड़ी की तरह आयटम तैयार हुआ। इसे लोगों ने पसंद किया। इसके बाद वह इसमें निरंतर सुधार करते रहे और 1915 तक बहुत कुछ वर्तमान सी दिखने वाली मेरठ की रेवड़ी अस्तित्व में आ चुकी थी।अंग्रेज अधिकारी भी इसके स्वाद के मुरीद थे। आज रामचंद्र के नाम से रेवड़ी गजक बनाने वाले आपको जगह जगह मिल जाएंगे।


    ठंड के सीजन की यह मिठाई स्वास्थ्य के लिए भी मुफीद

    गजक और रेवड़ी लोगों के लिए मिष्ठान न हो कर तिल और गुड़ के रूप में जाड़े में स्वास्थ्य की दृष्टि से खाने का अच्छा विकल्प है। लौंग, इलायची, जावित्री, जायफल मिलाया जाता है जिससे यह सर्दी में स्वास्थ्य के लिए गुणकारी है। नवरात्र से आरंभ होकर फरवरी के आरंभ तक तक इसकी बिक्री होती है।

    काफी समय तक गुड़ की रेवड़ी और लड्डू वाली काजू वाली गजक बनती रही। बाद में पट्टी गजक, स्प्रिंग रोल गजक जुड़ती चली गई। चॉकलेट राेल गजक और ड्राई फ्रूट समोसा गजक बाजार में आ चुकी है। वरुण अग्रवाल ने बताया कि 18 देशों में उनकी गजक और रेवड़ी जाती है।

    ये है जीआई टैग

    जीआई टैग एक ऐसा चिह्न या नाम है जो किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से आने वाले उत्पादों (जैसे फसल, हस्तशिल्प या औद्योगिक उत्पाद) को दिया जाता है, जो उस जगह की विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताओं को दर्शाता है और नकली उत्पादों को रोकने के साथ-साथ किसानों और उत्पादकों को बेहतर मूल्य और वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करता है।