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    111.49 KM लंबे कांवड़ पटरी मार्ग का बदला गया पूरा नक्शा, यूपी से उत्तराखंड तक मिलेगी डायरेक्ट कनेक्टिविटी

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 08:31 PM (IST)

    चौ. चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग का 650 करोड़ की लागत से 111.49 किमी लंबा नवनिर्माण होगा। पेड़ कटान विवाद के बाद अब नए सिरे से प्रोजेक्ट बना है। सड़क गं ...और पढ़ें

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    गंगनहर के दांयी तरफ होगा कांवड़ पटरी मार्ग का दोहरीकरण : जागरण


    जागरण संवाददाता, मेरठ। मुजफ्फरनगर से मेरठ होते हुए मुरादनगर तक चौ. चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग का नवनिर्माण 650 करोड़ की लागत से होगा। इसकी लंबाई 111.49 किमी है। इस प्रोजेक्ट की स्वीकृति अक्टूबर 2020 में हुई थी। लेकिन उसके बाद पेड़ कटान को लेकर हंगामा मचा था। जिसमें मामला एनजीटी में पहुंच गया। मुख्य सचिव के दौरे के बाद पेड़ कटान पर रोक लग गई थी।

    अब इस पूरे प्राेजेक्ट को नये सिरे से तैयार किया गया। कांवड़ पटरी मार्ग की बनने वाली सड़क अब 7.50 मीटर के बजाय केवल 2 मीटर की दूरी पर निर्माण की जाएगी। इसका अर्थ यह हुआ कि गंगनहर और पटरी मार्ग पर चलने वाले वाहनों की दूरी दो मीटर होगी। इस नई व्यवस्था में कटने वाले पेड़ों की संख्या बेहद कम हो गई है।

    एनजीटी में सुनवाई से पहले 62 किमी में 17446 पेड़ काटे जा चुके थे, जो कुल 1.12 लाख कटने थे। लेकिन अब पेड़ कटान को रोककर जिस हिस्से में पेड़ काटे गए, वापस उसी स्थान पर पौधरोपण किया जाएगा। वर्तमान में कांवड़ पटरी मार्ग का संचालन मुजफ्फरनगर से गाजियाबाद की ओर चलते हुए बांयी तरफ होता है। नई पटरी का दोहरीकरण गंगनहर के दांयी तरफ किया जाएगा।

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    इस दोहरे मार्ग की चौड़ाई सात मीटर होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट के रिवाइज्ड एस्टीमेट को अप्रैल 2025 में वित्तीय व्यय समिति व जुलाई 2025 में कैबिनेट की स्वीकृति प्राप्त हो गई थी। चौ. चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग की लंबाई मेरठ में 43.40 किमी, मुजफ्फरनगर में 56 किमी व गाजियाबाद जिले में 12 किमी आती है। शासनादेश जारी होने के बाद लगभग डेढ़ से दो वर्ष में नवनिर्माण पूरा होगा। इस पटरी के निर्माण से उप्र के साथ दिल्ली, उत्तराखंड़, पंजाब व हरियाणा के बीच वाहनों का आवागमन सुगम होगा।

    सात जनवरी को बैठक, 11 में एनजीटी की सुनवाई

    चौ. चरण सिंह कांवड़ गंगनहर पटरी मार्ग में आगामी सात जनवरी को कमिश्नरी में बैठक होगी। इसमें मुजफ्फरनगर, मेरठ व गाजियाबाद के संबंधित अधिकारी शामिल होंगे। वन विभाग संबंधित अनापत्ति समेत प्रोजेक्ट की कार्रवाई को आगे बढ़ाने की दिशा में अन्य बिंदुओं पर चर्चा होगी। साथ ही 11 जनवरी को एनजीटी में सुनवाई भी होगी।