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    मेरठ मेडिकल कालेज के आकस्मिक चिकित्सा विभाग में तीमारदारों की पिटाई; तीन जूनियर डाक्टर निलंबित, जांच समिति का गठन

    By Jagran NewsEdited By: Abhishek Saxena
    Updated: Wed, 25 Oct 2023 11:52 AM (IST)

    Meerut News मेडिकल कालेज की जांच समिति आज दोनों पक्षों के दर्ज करेगी बयान।आकस्मिक चिकित्सा विभाग में जूनियर डाक्टरों और तीमारदारों में कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि जूनियर डाक्टरों ने तीमारदार दीपक और देवेंद्र की जमकर पिटाई कर दी थी। महिलाओं की भी पिटाई की थी। उधर मामले का उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गंभीरता से संज्ञान लिया है।

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    मेडिकल कालेज में मारपीट की घटना की तस्वीर। जागरण

    जागरण संवाददाता, मेरठ। मेडिकल कालेज के आकस्मिक चिकित्सा विभाग में तीमारदारों की पिटाई के मामले में तीन जूनियर डाक्टरों को निलंबित किया गया था। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। यह बुधवार को दोनों पक्षों के बयान दर्ज करेगी।

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    मेडिकल कालेज प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने अस्थि रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. ज्ञानेश्वर टांक की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। इसमें विभागाध्यक्ष इमरजेंसी मेडिसिन विभाग डा. वैभव तिवारी और प्रभारी आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डा. हर्षवर्धन को रखा गया है। प्राचार्य ने निर्देश दिया है कि समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।

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    ये जूनियर हुए निलंबित

    निलंबित जूनियर डाक्टर अभिषेक वर्मा और आदित्य यादव एमएस तृतीय वर्ष के और अब्दुल मन्नान एमएस प्रथम वर्ष का छात्र है। सोमवार रात किला परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के रामनगर गांव निवासी पांच वर्षीय कुणाल पुत्र अंकित का अपने फूफा के यहां कमालपुर में चारा काटने वाली मशीन से अंगूठा कट गया था। जिसका उपचार कराने स्वजन मेडिकल कालेज आए थे।

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    पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर करेगी चिह्नित

    पीड़ित पक्ष की ओर से कमालपुर निवासी देवेन्द्र ने चार-पांच जूनियर डाक्टरों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। मेडिकल थाना पुलिस ने धारा 147 (उपद्रव करना, दो वर्ष तक की सजा, आर्थिक दंड या दोनों), 323 (स्वेच्छा से झगड़ा, एक साल तक की सजा), 504 (किसी व्यक्ति का जानबूझकर अनादर करना, दो साल तक की सजा, आर्थिक दंड या दोनों), 506 (धमकाना, दो साल की सजा) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

    सीओ सिविल लाइंस अरविंद चौरसिया ने बताया कि तहरीर में पीड़ितों ने खुद को अनुसूचित जाति (जाटव) बताया है। आरोपितों को अज्ञात बताया गया है। इसी कारण धारा 3 (2) (5) अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (दस साल या उससे अधिक के कारावास या जुर्माने का प्रविधान) अभी नहीं लगा है।

    आरोपितों की पहचान होने पर इसके तहत भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच की जा रही है। वीडियो फुटेज की जांच कर मारपीट करने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी

    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों को उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।