यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 01, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
केरल में अब आक्रामक रणनीति अख्तियार करेगा आरएसएस
केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब संघ कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर चुप बैठने की जगह आक्रामक रणनीति अख्तियार करेगा। इसके लिए आरएसएस वहां बड़ा जनांदोलन खड़ा कर सकता हैं।

मथुरा (जेएनएन)। केरल में प्रतिकूल हालात से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बेहद चिंतित है। ïयहां के वृंदावन में तीन दिवसीय समन्वय समिति की बैठक के पहले ही दिन केरल को लेकर आरएसएस की चिंता बैठक के पहले दिन के पहले ही घंटे में सामने आ गई।
केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब संघ कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर चुप बैठने की जगह आक्रामक रणनीति अख्तियार करेगा। इसके लिए आरएसएस वहां बड़ा जनांदोलन खड़ा कर सकता हैं। संघ की वृंदावन में आज से शुरू हुई तीन दिवसीय समन्वय समिति की बैठक के पहले दिन गठन विस्तार पर चर्चा के दौरान केरल का मुद्दा प्राथमिकता से उठा।
इस दौरान केरल से जुड़े संगठन कार्यकर्ताओं ने वहां के हालातों के बारे में जानकारी दी। बताया कि वामदलों के कार्यकर्ता किस तरह अत्याचार कर रहे हैं, वहां की पुलिस मामलों में कोई कार्रवाई नहीं करती। कुछ संघ परिवारों के उदाहरण भी सामने रखे। इस पर तय हुआ कि संघ अब वहां आंदोलन कर पूरे देश का ध्यान आकर्षित करेगा।

इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे। हालांकि संघ इस बात से संतुष्ट है कि केरल में प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उसका आधार बढ़ रहा है।
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संघ के लिए दूसरे एक और कठिन परिस्थिति वाले राज्य पश्चिम बंगाल की स्थिति पर भी प्रमुखता से चर्चा हुई लेकिन किन मुद्दों पर सहमति हुई है, यह बात बाहर नहीं आ सकी। संघ के पदाधिकारियों का कहना था कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आगामी दो साल तो हैं ही, लेकिन इसके बाद भी आगे तेजी से काम करते रहना है। अब संघ की शाखाओं में युवाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया गया।
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पहले सत्र में सुरक्षा-आर्थिक मोर्चे पर नहीं हुई बात
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समन्वय समिति की बैठक में पहले सत्र के दौरान केरल का मुद्दा छाया रहा, वहीं देश के आर्थिक और सुरक्षा मामलों में पर कोई वार्ता नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार एजेंडे में विशुद्ध संगठनात्मक मसले ही पहले सत्र में चर्चा के लिए थे।
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केरल का मुद्दा संगठन के कामकाज की दृष्टि से ही उठा। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मौजूद रहने की वजह से सत्तारूढ़ दल के सामने भी संघ का रुख स्पष्ट हो गया। वैसे इस बैठक से दो दिन पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया भी राष्ट्रपति को केरल में दलित अत्याचारों और राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई न करने की रिपोर्ट पेश कर चुके हैं।
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यह रिपोर्ट भी संघ की बात का समर्थन करने वाली मानी जा रही है। केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली, गृहमंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को समन्वय समिति की बैठक में शामिल होंगे।
