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    'ड्रीम गर्ल' का दिव्य-भव्य मथुरा का रोडमैप, हर गली रोशन-घरों में गंगाजल और हेरिटेज धर्मस्थल, काशी जैसा होगा विकास

    MP Hema Malini Plan For Mathura कान्हा की नगरी मथुरा काशी की तरह भव्य और दिव्य बनेगी। बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने विकास का रोडमैप तैयार किया है। 5000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क पानी बिजली सीवर कूड़ा निस्तारण आदि की व्यवस्था होगी। मथुरा की सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी केंद्रीय शहरी विकास कमेटी की सदस्य भी हैं।

    By viveka nand Edited By: Abhishek Saxena Updated: Mon, 06 Jan 2025 04:01 PM (IST)
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    Mathura News: मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने बनाया काशी की तरह मथुरा के लिए रोडमैप।

    विवेक राजपूत, जागरण, मथुरा। विकास की बात करें तो काशी का नाम हर किसी की जुबान पर है। लेकिन, अब काशी की तर्ज पर कान्हा की नगरी भव्य और दिव्य होगी। सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों का हेरिटेज विकास होगा। हर गली पक्की होगी, हर घर के नागरिकों को पीने के लिए गंगाजल मिलेगा।

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    हर एक गली का अंधकार दूर होगा, कचरा का निस्तारण शत-प्रतिशत होगा। हर एक सड़क बनेगी, फुटपाथ व्यवस्थित व सुंदर होगा। यमुना स्वच्छ व निर्मल होगी, एक भी नाले का पानी यमुना में नहीं गिरेगा। श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित होंगी। इस तरह के विकास का रोडमैप केंद्रीय शहरी विकास कमेटी की सदस्य सांसद हेमा मालिनी ने तैयार कर लिया है।

    सोमवार को इसे शासन में कमेटी के समक्ष रखा गया। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इस कार्ययोजना पर काम होगा। हरी झंडी के बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होगी। ये काम कान्हा की नगरी के लिए बड़ा होगा, जिससे न स्थानीय नागरिक अपितु देश−विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी विकास की जय-जयकार करेंगे। हर नागरिक को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी।

    2017 में नगर निगम बनाया गया मथुरा−वृंदावन

    वर्ष 2017 में वृंदावन और मथुरा नगर पालिका का अस्तित्व समाप्त कर नगर निगम बनाया गया। शहरी क्षेत्र के आसपास की 50 से अधिक ग्राम पंचायतों के आंशिक भाग नगर निगम में शामिल हुए। वॉर्ड की संख्या बढ़कर 70 पहुंच गई। विकास की बात करें तो नगर निगम का अधिकांश पैसा मंदिरों के आसपास क्षेत्र के विकास, प्रमुख सड़कों पर ही खर्च हो जाता है। जो बचता है, वह जलापूर्ति, सफाई आदि में खर्च हो जाता है। ऐसे में वॉर्ड एवं नई आबादी क्षेत्र विकास में पीछे रहा। स्थिति यह है कि शायद ही कोई वॉर्ड हो जो पूरी तरह विकास के मायने में पूरी तरह संतृप्त हो चुका हो।

    गंदगी से नहीं मिली निजात

    यहां की जनता को न तो पर्याप्त पीने का पानी मिल रहा और न सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरलाइन, गंदगी से निजात मिल पा रही। यही वजह है कि कई वार्ड से नगर निगम टैक्स तक नहीं वसूल पा रही। ऐसा नहीं, कि इस सच्चाई से नगर निगम के अफसर एवं महापौर अनभिज्ञ न हों, मगर धनराशि जरूरत के अनुरूप नहीं होने से सभी असहाय हैं। कोरोना काल के बाद कान्हा की नगरी में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। आज सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। यहां आने वाले विदेशी श्रद्धालु यहां की तस्वीर अच्छी लेकर नहीं लौट रहे हैं।

    पीएम मोदी और सीएम योगी भी दौरों में कर चुके हैं भव्यता की बात

    वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दौरे में यह तो साफ कर चुके हैं कि काशी के बाद मथुरा भव्य व दिव्य होगा। इसका असर अब दिखाई भी देने लगा है। केंद्रीय शहरी विकास कमेटी की सदस्य एवं स्थानीय सांसद हेमा मालिनी ने शहर के विकास का रोडमैप तैयार कर लिया है। तीर्थ विकास परिषद धार्मिक स्थलों का और विकास कराएगा, वहीं विकास प्राधिकरण सभी धार्मिक स्थलों के क्षेत्र को हेरिटेज स्थल के रूप में विकसित करेगा। मंदिर मार्ग पर भवन निर्माण का मानक तय होगा। इसके विपरीत कोई भी इमारत नहीं बन सकेगी। नगर निगम अपनी सीमा के हर क्षेत्र के नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं विकसित करेगा।

    शहर में सुविधाओं का हाल, ये तैयार विकास का प्रस्ताव

    पेयजल:

    शहरी क्षेत्र की करीब 13 लाख आबादी मौजूदा समय है। 120 एमएलडी पानी की शहर को जरूरत है, मगर नगर निगम 25 एमएलडी गंगाजल ही दे पा रहा है। कुल 85 एमएलडी ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। हर व्यक्ति को शुद्ध पेयजल मिले, इस पर 1400 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके लिए 258 एमएलडी गंगाजल बुलंदशहर की गंगा नदी से आएगा। गोकुल बैराज पर नया 250 एमएलडी की क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा। पाइपलाइन आदि कार्य होंगे। ये काम होने के बाद 50 वर्ष तक शहरी नागरिकों को पेयजल किल्लत नहीं होगी।

    प्रकाश :

    शहरी क्षेत्र में तमाम गली मुहल्ले ऐसे हैं, जहां स्ट्रीट लाइटों की कमी है। गलियां तो दूर, कई प्रमुख मार्ग पर भी स्ट्रीट लाइट नहीं होने से अंधेरा रहता है। इसके लिए नगर निगम को 80 हजार स्ट्रीट लाइट की जरूरत है। इसके सापेक्ष प्रकाश विभाग की 39 हजार ही लाइटें खंभों पर लगी हैं, लेकिन इनकी दूरी अधिक है। मानक के अनुसार 20 मीटर की दूरी पर एक लाइट होनी चाहिए। इसके अनुपात में प्रकाश विभाग को 41 हजार लाइटों की जरूरत है। इस कार्य के लिए 270 करोड़ रुपये चाहिए।

    कचरा निस्तारण :

    शहरी क्षेत्र से प्रतिदिन 350 टन कचरा निकलता है। पूर्व में नगर पालिका कार्यकाल का कचरा निस्तारण केंद्र की क्षमता कम होने से कचरा निस्तारण शत-प्रतिशत नहीं हो पा रहा था। एक माह पूर्व 300 टन की क्षमता का मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर चालू हुआ है, जिसके बाद ये समस्या काफी हद तक दूर हुई है। लेकिन, कचरा बढ़ने को देखते हुए निस्तारण के लिए करीब 180 करोड़ रुपये की नगर निगम को जरूरत है।

    सीवरेज :

    सीवरेज का सच भयावह है। शहर के मात्र एक तिहाई क्षेत्र में ही सीवरलाइन है। वृंदावन में तो 40 वर्ष पुरानी सीवर है, जो आए दिन ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर भरता है। श्रद्धालु गंदे पानी से होकर आराध्य के दरबार में पहुंचने को मजबूर हैं। नगर निगम क्षेत्र में 1600 किलोमीटर की सड़कें हैं। इनमें से मात्र 360 किलोमीटर सड़क पर ही सीवरलाइन डली हुई है। ऐसे में 1240 किलोमीटर सड़क में सीवरलाइन डाली जाएगी। इस पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस कार्य के बाद हर एक गली में सीवर होगी, जिससे घरों का मल नालियों में नहीं बनेगा। शहर स्वच्छ नजर आएगा।

    सड़क :

    शहरी क्षेत्र में 1600 किलोमीटर सड़कें हैं। इनकी सच्चाई यह है कि प्रमुख सड़कों को छोड़ दें तो तमाम में गड्ढे हैं। इनके फुटपाथ ऊबड़-खाबड़ व अव्यवस्थित हैं। धूल उड़ती रहती है। कई गलियां कच्ची हैं। नगर निगम को सभी सड़कों को बनाने के लिए 2700 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। 300 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत होगी और 850 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। मरम्मत पर 500 करोड़ और निर्माण पर 2200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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