मथुरा में ग्राम पंचायतों की व्यावसायिक संपत्ति से बेदखल होंगे कब्जेदार, आय के स्रोत बढ़ाने के लिए जिला पंचायतीराज विभाग की कवायद
मथुरा जिला पंचायतीराज विभाग 495 ग्राम पंचायतों में व्यावसायिक महत्व की संपत्तियों की पहचान कर रहा है। इन संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों को बेदखल ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, मथुरा। जिला पंचायतीराज विभाग जिले की 495 ग्राम पंचायतों में ऐसी संपत्तियों को चिन्हित कर रहा है, जो व्यवसायिक महत्व की तो हैं, लेकिन उनका कोई किराया विभाग को नहीं मिल रहा है या फिर अवैध कब्जे का शिकार हैं। ऐसी संपत्तियों पर काबिज लोगों को बेदखल किया जाएगा। सोमवार से ऐसी संपत्तियों का सर्वे प्रारंभ होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों की आय के स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई है, ताकि क्षेत्रीय विकास के लिए अनुदान का इंतजार न करना पड़े। इस योजना के तहत फल और सब्जियों की दुकान, उर्वरक और बीज भंडारण सुविधा, जूट बैग बनाने जैसे व्यवसाय को प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण जनता को रोजगार मिले तो दूसरी ओर ग्राम पंचायत को भी किराया मिल सके।
नए नहीं अवैध निर्माण के प्रकरण
दूसरी ओर ग्राम पंचायत की भूमि पर अवैध कब्जे या अवैध निर्माण के प्रकरण कोई नए नहीं हैं। कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। दूसरी ओर ग्राम पंचायत प्रशासन की उदासीनता के कारण सरकारी संपत्ति का निजी हित में व्यावसायिक प्रयोग भी कई बार देखा गया है।
जिला पंचायतीराज विभाग अब ऐसी संपत्तियों का चिन्हीकरण कर रहा है। जहां किराया जमा कराया जा रहा होगा, वहां उसकी दर की समीक्षा होगी, जबकि जहां किराया नहीं मिल रहा है, वहां काबिज लोगों को बेदखल किया जाएगा। अभी तक चौमुहां में 16 दुकानों की जानकारी मिली है, जो ग्राम पंचायत की भूमि पर बनी हैं। इनका सर्वे कराया जाएगा कि आखिर किन कारणों से सरकारी संपत्ति का निजी व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है।
ग्राम पंचायतों की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इसमें ग्राम पंचायतों की संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराने और उनको किराए पर देने का कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा। - धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ।

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