बालाजी के रूप में बांकेबिहारी के शृंगार पर विवाद, सेवायत बोले- ये परंपरा का उल्लंघन, विष्णु स्वामी संप्रदाय की जगह रामानंद परंपरा से किया शृंगार
वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में रविवार को ठाकुरजी का श्रृंगार बालाजी के स्वरूप में किया गया, जिस पर सेवायतों ने आपत्ति जताई। सेवायतों ने इसे मंदिर की ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में रविवार सुबह पट खुले तो गर्भगृह में विराजमान ठाकुरजी का स्वरूप श्रद्धालुओं को अलग तरह का दिखा। पहली झलक में बालाजी का स्वरूप नजर आया। दर्शन से आल्हादित श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए निकलते रहे। कुछ देर बाद ही शृंगार को लेकर सेवायतों का विरोध सामने आ गया। सेवायतों ने इसे मंदिर की मर्यादा व सेवा परंपरा का उल्लंघन बताया। दिवस सेवाधिकारी का कहना है कि ठाकुरजी का शृंगार भक्त व सेवायत के भाव के अनुसार किया गया।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुबह पौने नौ बजे पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची और दर्शन के साथ जयकारे गूंजने लगे। गर्भगृह में विराजे ठाकुरजी के सिर पर चांदी का मुकुट सजा था। यह स्वरूप दक्षिण भारतीय रामानंद परंपरा के अनुसार भगवान बालाजी का स्वरूप बताया गया। बालाजी के रूप में की गई सजावट पर श्रद्धालु तो निहाल नजर आए, लेकिन सेवायतों ने इसे परंपरा का उल्लंघन बताकर विरोध जताया।
सेवायतों के वाट्सएप ग्रुप में विरोध के मैसेज चलने लगे। दोपहर में शयन के बाद नया शृंगार किया गया। रविवार को हुए श्रृंगार को लेकर दिवस सेवाधिकारी रजत गोस्वामी का तर्क है कि शृंगार का भाव तो खुद ठाकुरजी ही प्रदान करते हैं। हम तो उनके मन के अनुसार ही करते हैं।
शृंगार में बदलाव का इसलिए किया जा रहा है विरोध
मंदिर सेवायत एवं उच्चाधिकार प्रबंधन समिति के सदस्य दिनेश गोस्वामी का कहना है कि ठाकुरजी राधा और कृष्ण दोनों हैं। स्वामी हरिदास के भाव से विष्णु स्वामी संप्रदाय परंपरा से शृंगार किया जाता है।
इसमें मांग(राधारानी की मांग) और पाग (पगड़ी) बहुत जरूरी है। बाएं तरफ ठाकुरजी का भाव होता है, दाहिनी तरफ राधाजी का। ठाकुरजी को पगड़ी पहनाते हैं और राधाजी की मांग पर चंद्रिका होती है। गोस्वामी बताते हैं कि हम राधाजी को रानी नहीं बल्कि ग्वालिन मानते हैं। आज शृंगार में ठाकुरजी को टोपी पहनाई गई, लेकिन मांग नहीं थी।
इसलिए परंपरा का उल्लंघन हुआ है। मंदिर सेवायत कन्हैया गोस्वामी ने सेवायतों के वाट्सएपग्रुप पर लिखा कि ठाकुर बांकेबिहारीजी के शृंगार में पारंपरिक पाग उपास्य-भावना की मर्यादा है, ऐसा मैंने बड़ों से सुना है। हमें इस मर्यादा का आग्रहपूर्वक सम्मान करना चाहिए न कि लोभवश परदेशी के मन के अनुसार चलना चाहिए।
20 वर्ष पहले शृंगार पर हुआ था बखेड़ा, हुई थी कार्रवाई
ठाकुर बांकेबिहारी के शृंगार पर सबसे बड़ा बखेड़ा सितंबर 2006 में हुआ था। सेवाधिकारी ने ठाकुरजी को जींस, टी शर्ट और चश्मा पहना दिया था। इसके बाद जमकर विरोध हुआ। सेवायत दिनेश गोस्वामी ने बताया कि उस समय गोस्वामियों की समिति थी, इसलिए सेवाधिकारी पर कार्रवाई की गई थी।

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