आलू की फसल पर बढ़ा झुलसा का खतरा, मौसम की मार देख किसानों ने किया उपचार शुरू
मैनपुरी में आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसान चिंतित हैं। लगातार खराब मौसम और कम कीमतों के कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा ...और पढ़ें

आलू की फसल।
जासं, मैनपुरी। आलू की कच्ची और पकी दोनों ही सीजन की फसल इस बार किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। कच्ची फसल में जहां लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है, वहीं अब पकी सीजन की फसल पर भी झुलसा रोग का खतरा मंडराने लगा है। लगातार चार-पांच दिनों से छाए बादल, कोहरा और तुषार (पाला) गिरने से खेतों में नमी बढ़ गई है, जिससे झुलसा रोग तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है।
हालात को देखते हुए किसान दवाओं का छिड़काव कर फसल बचाने में जुट गए हैं। इस वर्ष पहले बारिश के कारण बुवाई और खोदाई दोनों में देरी हुई। ऊपर से अब आलू के दाम भी गिरकर 300 रुपये प्रति पैकेट (50–55 किलोग्राम) से नीचे पहुंच गए हैं। किसान गजेंद्र मिश्रा बताते हैं कि इतनी कीमत पर न तो मजदूरी निकल पा रही है और न ही खाद, बीज व दवाओं की लागत पूरी हो पा रही है।
मौसम की मार और बाजार की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कृषि विज्ञानी डा. रामनगीना सिंह का कहना है कि इस समय झुलसा रोग के फैलने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है। यदि समय पर दवा का छिड़काव नहीं किया गया तो पूरी फसल चौपट हो सकती है। इसी डर से किसान खेतों में लगातार निगरानी कर रहे हैं और महंगी दवाइयों का सहारा ले रहे हैं।
किसानों की बात
इस बार आलू की कच्ची फसल में ही भारी नुकसान हो गया। अब पकी फसल पर झुलसा का डर सता रहा है। दवा पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, फिर भी फसल बचने की कोई गारंटी नहीं है।
- गजेंद्र मिश्रा, नगला पैंठ
आलू के दाम इतने गिर गए हैं कि लागत भी नहीं निकल रही। ऊपर से कोहरा और तुषार से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। मजबूरी में कर्ज लेकर दवा छिड़क रहे हैं।
- गजराज सिंह शाक्य, नगला पैंठ

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