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    रावण-बाणासुर संवाद सुन रोमांचित हो उठे दर्शक

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 07 Nov 2019 11:38 PM (IST)

    घुघली क्षेत्र के मटकोपा गांव में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन गुरुवार की रात रामलीला के कलाकारों ने रावण-बाणासुर संग्राम का शानदार मंचन किया ...और पढ़ें

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    रावण-बाणासुर संवाद सुन रोमांचित हो उठे दर्शक

    महाराजगंज: घुघली क्षेत्र के मटकोपा गांव में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन गुरुवार की रात रामलीला के कलाकारों ने रावण-बाणासुर संग्राम का शानदार मंचन किया। मिथिला के राजा जनक के आमंत्रण पर राम- लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ राजा जनक के यहां सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं। राम, लक्ष्मण के सौंदर्य को देख वहां सभी मोहित हो जाते हैं। इसी बीच लंकापति रावण बिना आमंत्रण सीता स्वयंवर में पहुंचता है। यह देखकर सभापति बाणासुर रावण का परिचय पूछते हैं।

    बाणासुर के रावण से परिचय पूछते ही वह क्रोध से तमतमा उठता है और फिर यहीं से रावण और बाणासुर का संवाद शुरू होता है। लंकापति रावण सीता स्वयंवर के लिए आमंत्रण न मिलने पर राजा जनक पर क्रोधित होता। निमंत्रण न दिए जाने का कारण पूछता है। जनक कहते हैं कि समुंदर पार लंका जाना संभव नहीं था। इसीलिए निमंत्रण नहीं भेज सके। तो रावण और क्रोधित हो जाता है और कहता है कि अगर आप ने समुद्र में एक पत्र भी डाल दिया होता तो समुंद्र में इतना साहस नहीं होता कि हम तक वह न पहुंचा देता। उसके पश्चात सीता स्वयंवर में आये रावण सहित तमाम राजाओं ने धनुष तोड़ने की पूरी कोशिश की, पर वह हिला तक ना सके। राजा जनक की चिता बढ़ जाती है।

    अंत में प्रभु श्री राम की बारी आती है और वह शिव के धनुष को उठाकर खंडित कर देते हैं। धनुष टूटते ही समूचा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। इस अवसर पर राजाराम गुप्ता, इस्तखार खान, पुनीत कुमार श्रीवास्तव, प्रकाशचंद्र चौहान, केश्वर लाल, भानु प्रताप श्रीवास्तव, रामबदन, अरुण कुमार चौहान, अंगद, अमर, सितई, केदार, माथुर, सिटू, अंकित, जोगिदर साहनी व बालक दास आदि उपस्थित रहे।