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    World Asthma Day 2022: जानिए सांस की इस गंभीर बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके

    By Sanjay PokhriyalEdited By:
    Updated: Tue, 03 May 2022 05:47 PM (IST)

    World Asthma Day 2022 लखनऊ के केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. सूर्यकान्त ने बताया कि अस्थमा की समस्या लाइलाज नहीं रही। इसको चिकित्स ...और पढ़ें

    सेमल की रुई वाले बिस्तरों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    लखनऊ, जेएनएन। विश्‍व अस्थमा दिवस प्रति वर्ष मई माह के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह तीन मई को मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य अस्थमा की बीमारी और देखभाल के बारे में लोगों को जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की थीम है, ‘क्लोजिंग गैप्स इन अस्थमा केयर’ अर्थात अस्थमा के इलाज में आ रही कमियों को दूर करना। अस्थमा (दमा) एक आनुवांशिक रोग है, जिसमें रोगी की श्वसन नलिकाएं अतिसंवेदनशील होती हैं और कुछ कारकों के प्रभाव से उनमें सूजन आ जाती है। इससे रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है। ऐसे कारकों में धूल, पेपर की डस्ट, रसोई का धुआं, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन, सर्दी, जुकाम, धूमपान, फास्टफूड, चिंता, पालतू जानवर, परागकण, इत्र, परफ्यूम, अगरबत्ती, धूपबत्ती, वायरस एवं बैक्टीरिया के संक्रमण आदि प्रमुख हैं।

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    ग्लोबल बर्डन आफ अस्थमा रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में लगभग 30 करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं और भारत में ये संख्या तीन करोड़ से अधिक है। दो तिहाई से अधिक लोगों में अस्थमा बचपन से ही प्रारंभ हो जाता है। इसमें बच्चों को खांसी होना, सांस फूलना, सीने में भारीपन, छींक आना, नाक बहना तथा सही विकास न हो पाना जैसे लक्षण होते हैं। शेष एक तिहाई लोगों में अस्थमा के लक्षण युवा अवस्था में प्रारंभ होते हैं। अस्थमा बचपन या युवावस्था में ही प्रारंभ होने वाला रोग है। इसके इलाज में इनहेलर चिकित्सा सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि इसमें दवा की मात्रा का प्रयोग कम होता है। इसके साथ ही दवा का असर सटीक एवं दुष्प्रभाव बहुत कम होता है।

    प्रमुख जांचें: इस रोग के निदान में लक्षणों के आधार पर परीक्षण करके जैसे सीने में आला लगाकर तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच पीईएफआर व स्पाइरोमेट्री की जाती है। अन्य जांचों में रक्त की जांच, छाती तथा पैरानेसल साइनस का एक्स-रे कराया जाता है।

    ब्रोंकियल थर्मोप्लास्टी: इस विधि में सांस नलियों में उपस्थित बढ़ी हुई मांसपेशियों को गर्मी उत्पन्न करने वाली मशीन की मदद से संकुचित किया जाता है।

    बचाव

    • मौसम बदलने से सांस की तकलीफ बढ़ती है तो मौसम बदलने के चार से छह सप्ताह पहले से ही सजग हो जाना चाहिए और उचित चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए।
    • ऐसे कारक जिनकी वजह से सांस की तकलीफ बढ़ती है या जो सांस के दौरे को जन्म देते हैं, उनसे बचाव करना चाहिए। धूल, धुआं, नमी, सर्दी व धूमपान से बचना चाहिए।
    • ऐसे खाद्य पदार्थ जो रोगी के संज्ञान में स्वयं आ जाते हैं कि वे उसे नुकसान कर रहे हैं, उनके सेवन से बचना चाहिए।
    • शीतलपेय, फास्टफूड तथा केमिकल व प्रिजरवेटिव युक्त खाद्य पदार्थों जैसे चाकलेट, टाफी आदि से परहेज करना चाहिए।
    • सर्दी, जुकाम, खराश या फ्लू जैसी समस्या होने पर तत्काल उपचार लेना चाहिए। इससे बीमारी के बिगड़ने की आशंका नहीं रहती है।
    • व्यायाम या मेहनत का कार्य करने से पहले इनहेलर अवश्य लेना चाहिए।
    • घर में सीलन न रहे और हवा व धूप आनी चाहिए।
    • बच्चों को लंबे रोएंदार कपड़े न पहनाएं और न ही इस तरह के खिलौनों से खेलने दें।

    अस्थमा का उपचार

    अस्थमा के उपचार में इनहेलर चिकित्सा बहुत कारगर है। इसे विशेषज्ञ की सलाह पर नियमित लेना चाहिए।

    अस्थमा के अन्य उपचार

    बायोलाजिकल या मोनोक्लोनल एंटीबाडी थेरेपी: यह एक नए प्रकार का उपचार है, जिसे प्रारंभिक उपचारों के असफल होने पर दिया जाता है। इसमें एंटी आईजीई, एंटी इंटरल्यूक्नि 4 व 5 आदि शामिल हैं।