Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    भारत और नेपाल के बीच बढ़ेगी वाहनों की गति, फोर लेन बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ

    By Dharmendra PandeyEdited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:12 PM (IST)

    Indo-Nepal Road Upgraded: फोर लेन बनाने के लिए प्राधिकरण को सरकारी व गैर सरकारी 325 हेक्टेअर भूमि भी चाहिए होगी। इसे भी चिह्नित कर लिया गया है। यह जमी ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    बाराबंकी से बहराइच के बीच फोर लेन एनएच 927

    अंशू दीक्षित, जागरण, लखनऊ : पूर्वांचल के बाद अब अवध से भी नेपाल जाने वाले वाहनों को गति और तेज होगी। इस अभियान के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने बाराबंकी से बहराइच के बीच फोर लेन एनएच 927 बनाने की प्रकिया तेज कर दी है।

    एनएचएआइ के परियोजना निदेशक (लखनऊ) ने प्रस्ताव बनाकर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) को भेज दिया है। फोर लेन बनाने के लिए प्राधिकरण को सरकारी व गैर सरकारी 325 हेक्टेअर भूमि भी चाहिए होगी। इसे भी चिह्नित कर लिया गया है। यह जमीन फोर लेन के बगल में सर्विस लेन बनाने के काम आएगी।

    फोर लेन रोड का प्रोजेक्ट बाराबंकी से बहराइच की 101 किमी यात्रा को सुगम बनाएगा। इतना ही नहीं इस राष्ट्रीय राजमार्ग के बन जाने पर बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और नेपाल के लोगों को सहूलियत मिलेगी। एनएचएआइ ने प्रोजेक्ट को सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) से अनुमोदन के बाद छह नवंबर 2025 को ही फाइल आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (भारत सरकार) को अनुमोदन के लिए भेज दी है।

    पूरे प्रोजेक्ट पर 6,927 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसे दो चरणों में बनाया जाएगा। पहला चरण बाराबंकी से जरवल और दूसरे में जरवल से बहराइच के बीच बनेगा। उम्मीद की जा रही है वर्ष 2026 के मध्य तक आर्थिक मंजूरी मिलते ही प्राधिकरण टेंडर प्रकिया शुरू कर देगा।

    परियोजना निदेशक, एनएचएआइ नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि बाराबंकी से बहराइच के बीच फोर लेन बनाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति से अनुमोदन के बाद छह नवंबर 2025 को ही फाइल आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति को अनुमोदन के लिए भेज दी है। फोर लेन को बनाने में 6,927 करोड़ की लागत खर्च आएगा।

    जमीनों के दामों में उछाल आना तय

    जिस रूट से राष्ट्रीय राजमार्ग निकलेगा, वहां जमीनों की कीमतें भी बढ़नी तय मानी जा रही है। इसलिए निवेशक भी अभी से सक्रिय हो गए हैं। आने वाले समय में सरकारी व गैर सरकारी कोलोनाइजर भी अपनी कालोनियों को विकसित करने के लिए आगे आएंगे।