सिक न्यू बार्न यूनिट के लिए खरीदे जाएंगे वार्मर, फोटो थेरेपी उपकरण; नए SNCU और बेड की संख्या बढ़ाने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग सिक न्यू बार्न यूनिट (एसएनसीयू) के लिए वार्मर, फोटो थेरेपी मशीन जैसे उपकरण खरीदेगा। वर्तमान में 120 एसएनसीयू में 1800 नवजात शिशुओं के ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग सिक न्यू बार्न यूनिट (एसएनसीयू) के लिए वार्मर, फोटो थेरेपी मशीन, लेरिंजोस्कोप, नियोनेटल वेंटीलेटर सहित अन्य जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे। अभी जिला स्तर के अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में 120 सिक न्यू बार्न यूनिट (एसएनसीयू) का संचालन हो रहा है।
इनमें लगभग 1800 नवजात शिशुओं के इलाज की व्यवस्था है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक नौ हजार से अधिक अति गंभीर शिशुओं का इलाज भी यूनिट में किया जा चुका है। इसी आधार पर अब इनके बेड, मानव संसाधन के साथ ही उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है।
एसएनसीयू में न्यूनतम 12 बेड होते है। इनमें 1800 ग्राम से कम वजन और नौ महीने से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के इलाज की व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में एसएनसीयू में भर्ती की दर लगभग 116 प्रतिशत रही है। इसलिए ऐसे चिकित्सालय जहां प्रसव की संख्या ज्यादा है, वहां भी एसएनसीयू बनाए जाएंगे।
इसके अलावा, भारत सरकार के निर्देश पर एसएनसीयू को मदर न्यूबार्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) में उच्चीकृत किया जा रहा है। एसएनसीयू में सिर्फ नवजात को ही भर्ती करने और इलाज की व्यवस्था होती है। यदि नवजात को मां के दूध या कंगारू केयर की जरूरत पड़ती है तो उसे एसएनसीयू में आना पड़ता है।
इसलिए अब एसएनसीयू को एमएनसीयू के रूप में उच्चीकृत करके वहां मां को भी भर्ती करने की व्यवस्था की जा रही है। इससे जरूरत पड़ने पर बच्चे को मां के साथ रखा जा सकता है। वर्तमान में लखनऊ के साढ़ामऊ स्थित 100 बेड के अस्पताल और गाजियाबाद के जिला स्तर के एक अस्पताल में एमएनसीयू की शुरुआत की गई है।
इसके अलावा बाराबंकी में जिला स्तर के अस्पताल में एमएनसीयू बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य डा़ मिलिंद वर्द्धन ने बताया कि भारत सरकार ने एसएनसीयू को एमएनसीयू के रूप में उच्चीकृत करने के निर्देश दिए हैं। इसकी शुरुआत कर दी गई है।

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