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    UP में प्रीपेड मीटर कनेक्शन पर भी वसूली जा रही सिक्योरिटी, परिषद ने की नियम खिलाफ वसूले गए पैसे लौटाने की मांग

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 12:00 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ नियम विरुद्ध सिक्योरिटी राशि वसूली जा रही है। विद्युत अधिनियम-2003 के तहत प्रीपेड मीट ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बिजली का नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के एवज में 6016 रुपये लेने के साथ ही नियम विरुद्ध सिक्योरिटी धनराशि भी वसूली जा रही है। बिजली कंपनियों की इस तरह की अनियमितता पर सवाल उठाते हुए विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ताओं से वसूली गई धनराशि को लौटाने की मांग की है।

    विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) में स्पष्ट व्यवस्था है कि प्रीपेड मीटर पर किसी भी प्रकार की सिक्योरिटी राशि नहीं ली जा सकती है। पोस्टपेड मीटर के मामले में ही सिक्योरिटी राशि लेने की व्यवस्था है। पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने 10 सितंबर को नया कनेक्शन प्रीपेड मीटर के माध्यम से ही देने का आदेश किया था।

    लगभग 3.18 लाख नए कनेक्शन दिए

    तब से अब तक लगभग 3.18 लाख नए कनेक्शन दिए गए हैं। गौर करने की बात यह है कि प्रीपेड मीटर की कीमत वसूलने के साथ ही कंप्यूटर साफ्टवेयर में प्रीपेड के बजाय पोस्टपेड मोड दिखाकर सिक्योरिटी धनराशि लेने के मामले सामने आए हैं। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने ऐसे कुछ उपभोक्ताओं का ब्योरा देते हुए बताया कि महोबा निवासी शशांक निगम ने 30 दिसंबर को तीन किलोवाट का कनेक्शन लिया। उनसे स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 6016 रुपये वसूलने के साथ ही 1200 रुपये सिक्योरिटी राशि वसूली गई।

    मथुरा निवासी सुनीता से चार किलोवाट कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर शुल्क के साथ 1600 रुपये सिक्योरिटी, बलिया निवासी विजेंद्र सिंह से एक किलोवाट के कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर शुल्क के साथ 100 रुपये सिक्योरिटी तथा गोरखपुर निवासी सोनी देवी से एक किलोवाट के कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर शुल्क के साथ ही 300 रुपये सिक्योरिटी राशि जमा कराई गई। वर्मा ने कारपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि नियम विरुद्ध वसूली गई सिक्योरिटी धनराशि उपभोक्ताओं को लौटाई जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।