उत्तर प्रदेश में MSP पर रिकॉर्ड 'श्रीअन्न' खरीद, बाजरा और ज्वार उगाने वाले किसानों को हुआ फायदा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में 'श्रीअन्न' (मिलेट्स) की सरकारी खरीद ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में बाज ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों से यूपी में 'श्रीअन्न' की रिकॉर्ड खरीद
डिजिटल डेस्क, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 'श्रीअन्न' (मिलेट्स) को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि प्रदेश के किसानों ने खुले बाजार के बजाय सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भरोसा जताया है। इस वर्ष बाजरा, ज्वार और मक्का की खरीद ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं, जिसके बदले किसानों को करोड़ों रुपये का सीधा भुगतान किया गया है।
बाजरा खरीद में ऐतिहासिक उछाल
इस साल बाजरा की खरीद में सबसे बड़ी छलांग देखने को मिली है। पिछले वर्ष (2024-25) जहाँ 1.01 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया था, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा दोगुना होकर 2.13 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। इसके लिए किसानों को 598.04 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि पिछले साल यह राशि मात्र 268 करोड़ रुपये थी।
ज्वार और मक्का की सरकारी खरीद की स्थिति
सरकार की पारदर्शी नीतियों के चलते ज्वार और मक्का उत्पादक किसानों ने भी बढ़-चढ़कर सरकारी केंद्रों पर पंजीकरण कराया:
ज्वार: 11 जनपदों में हुई खरीद के दौरान 13,454 किसानों से 43,562 मीट्रिक टन ज्वार खरीदा गया, जिसके बदले 162 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
मक्का: 25 जनपदों में 13,209 मीट्रिक टन मक्का की खरीद पूरी हुई, जिससे किसानों को 31.96 करोड़ रुपये मिले।
खरीद का जिलावार विवरण और MSP दरें
सरकार ने 'श्रीअन्न' की गुणवत्ता के आधार पर आकर्षक समर्थन मूल्य तय किए थे, जिससे किसान प्रोत्साहित हुए:
ज्वार (मालदांडी): 3749 रुपये/कुंतल
बाजरा: 2775 रुपये/कुंतल
मक्का: 2400 रुपये/कुंतल
| फसल | खरीद जनपद | पंजीकृत किसान | कुल खरीद (MT) |
| बाजरा | 33 जनपद (आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज आदि) | 90,513 | 2.13 लाख |
| ज्वार | 11 जनपद (बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर आदि) | 20,307 | 43,562 |
| मक्का | 25 जनपद (बदायूं, हरदोई, कन्नौज आदि) | 7,106 | 13,209 |
आत्मनिर्भर किसान, मजबूत उत्तर प्रदेश
पहली अक्टूबर से शुरू हुई यह खरीद प्रक्रिया अब सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीअन्न की खेती की लागत कम होने और सरकार द्वारा ऊँची MSP मिलने से उत्तर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक फसलों के मुकाबले मिलेट्स की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। यह बदलाव न केवल किसानों की आय दोगुनी करने में सहायक है, बल्कि प्रदेश को 'मिलेट्स हब' के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

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