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    यूपी में आवासीय क्षेत्रों में नहीं जारी होंगे थोक दवा के लाइसेंस, कोडीन सीरप मामले के बाद FSDA की नई गाइडलाइन

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 10:05 PM (IST)

    खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने यूपी में थोक दवा लाइसेंस जारी करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। कोडीन सीरप की अवैध बिक्री के बाद यह कदम ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने नए थोक दवा के लाइसेंस जारी करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। कोडीन युक्त सीरप की अवैध बिक्री के दौरान मिली गड़बड़ियों के बाद यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। खासतौर से अब थोक दवा लाइसेंस आवासीय क्षेत्रों और भवनों में नहीं जारी किए जाएंगे।

    लाइसेंस के लिए जरूरी अनुभव प्रमाण पत्र देने वाली फर्म को वेतन और उपस्थिति का ब्यौरा भी देना होगा। ऐसे लोग या फर्म जिनके खिलाफ ड्रग एंड कास्मेटिक या एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई हुई हो, उन्हें नया लाइसेंस नहीं जारी किया जाएगा।

    आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

    एफएसडीए आयुक्त रोशन जैकब ने थोक दवा लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक सुदृढ़ व पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश में कहा है कि आवेदनकर्ता को अब जिस जगह व्यापार करना है, उसका पंजीकृत किराया समझौता (रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट) देना होगा। यदि भवन स्वामी रक्त संबंधी (ब्लड रिलेशन) में हो तो उसे नवीनतम अनापत्ति प्रमाण पत्र देना होगा।

    यदि आवेदक स्वयं परिसर का मालिक होगा तो रजिस्ट्री, विकास प्राधिकरण का आवंटन प्रमाण पत्र, कब्जा प्रमाण पत्र, राजस्व विभाग से जारी कोई अभिलेख देना होगा। आवास और रिहायशी इलाकों में थोक के लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे। जहां कार्य शुरू होना है वह जगह शटर लगी दुकान और सड़क पर होना जरूरी होगा।

    निरीक्षण और सत्यापन प्रक्रिया

    सहायक आयुक्ताें और औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पोर्टल पर मिले आवेदन के सभी अभिलेखों का परीक्षण करके एक बार में ही सभी कमियों के बारे में अपने सवाल उठाएंगे। प्रस्तावित प्रतिष्ठान के निरीक्षण के समय जीपीएस लोकेशन, दवा भंडारण की व्यवस्था, फ्रिज, बिजली की व्यवस्था, परिसर की खुले शटर, साइन बोर्ड, आसपास की दुकानें, भवन, प्लाट, सड़क को प्रदर्शित करते हुए फोटो देनी होगी।

    नक्शे को सत्यापित करते हुए रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। यही नहीं सहायक आयुक्तों को हर महीने स्वीकृत आवेदनों के सापेक्ष 10 प्रतिशत प्रतिष्ठानों का औचक भौतिक निरीक्षण करते हुए सत्यापन करना होगा। आयुक्त ने सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा है।