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    यूपी में बिचौलियों का खेल खत्म, फैमिली आईडी से 98 योजनाओं का फायदा लेना हुआ और भी आसान

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 05:51 PM (IST)

    योगी सरकार की 'फैमिली आईडी' पहल से उत्तर प्रदेश में 98 सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक आसानी से पहुँच रहा है। यह 12 अंकों की आईडी भ्रष्टाचार र ...और पढ़ें

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    यूपी फैमिली आईडी से 98 सरकारी योजनाओं का लाभ

    डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'अंत्योदय' के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। प्रदेश के हर पात्र नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुँचाने के लिए 'फैमिली आईडी' एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप, अब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि योजनाएं खुद चलकर पात्र परिवारों तक पहुँचेंगी।

    12 अंकों की आईडी से पारदर्शी हुआ सिस्टम

    प्रमुख सचिव नियोजन, आलोक कुमार के अनुसार, अब तक केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 प्रमुख योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। यह 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगा रहा है, बल्कि 'फर्जी लाभार्थियों' को सिस्टम से बाहर कर वास्तविक जरूरतमंदों को जगह दे रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 15 करोड़ 7 लाख से अधिक नागरिक इस डेटाबेस का हिस्सा बन चुके हैं।

    बिना राशन कार्ड वाले परिवारों को भी मिलेगी संजीवनी

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि फैमिली आईडी का उद्देश्य केवल राशन कार्ड धारकों तक सीमित नहीं है। वे परिवार जो किसी कारणवश राशन कार्ड की सूची में नहीं हैं, वे भी इस आईडी के माध्यम से अपनी पात्रता सिद्ध कर योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए अब तक 44 लाख से अधिक नागरिकों ने पोर्टल पर आवेदन किया है, जिनका सत्यापन शहरी क्षेत्रों में लेखपाल और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।

    प्रमाण पत्रों की भागदौड़ से मुक्ति

    फैमिली आईडी के लागू होने से नागरिकों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए बार-बार आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।

    • स्वतः चयन: डेटाबेस में जानकारी दर्ज होने के बाद विभिन्न योजनाओं के लिए पात्रता का निर्धारण सिस्टम द्वारा स्वतः कर लिया जाएगा।

    • समय और धन की बचत: एक बार पंजीकरण होने पर डेटा का उपयोग कई विभागों द्वारा किया जा सकेगा, जिससे जनता का श्रम और पैसा दोनों बचेंगे।

    तकनीकी मजबूती और सुरक्षा

    इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए इसे आधार और मोबाइल नंबर से लिंक करना अनिवार्य किया गया है। ओटीपी आधारित सत्यापन और ई-केवाईसी के माध्यम से डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। खास बात यह है कि यह कार्ड पूरी तरह निःशुल्क है और अब तक 19 लाख से अधिक भौतिक कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जो डिजिलॉकर (DigiLocker) पर भी उपलब्ध हैं।

    योगी सरकार की यह 'एक परिवार-एक पहचान' नीति न केवल शासन को सुगम बना रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक डेटा-संचालित (Data-Driven) सुशासन मॉडल की ओर ले जा रही है, जहाँ हकदार को उसका हक मिलना तय है।