यूपी में आपदा प्रबंधन के लिए ली जाएगी IIT की मदद, जानमाल का नुकसान कम करने के लिए विशेषज्ञ मॉडल होंगे लागू
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए) आपदा प्रबंधन के लिए आईआईटी कानपुर और रुड़की की मदद लेगा। इसका उद्देश्य जानमाल के नुकसान को कम ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए) आइआइटी कानपुर व रुड़की की मदद लेगा। यूपीएसडीएमए की कोशिश है कि आपदा प्रबंधन के लिए आइआइटी के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जा रहे माडल को लागू किया जाए, जिससे जानमाल का कम से कम नुकसान हो।
शुक्रवार को यूपीएसडीएम के पिकप भवन स्थित कार्यालय में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव मनीष भारद्वाज ने राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बाढ़, अग्निकांड, हीटवेव, शीतलहर, वज्रपात व भूकंप से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए आइआइटी की विशेषज्ञों की मदद ली जाए।
साथ ही आपदा को लेकर एनसीसी, भारत स्काउट गाइड, स्कूल-कालेज के विद्यार्थियों सहित आमजनों को प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के पास स्थित गांवों में नाविकों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दिया जाए।
यूपीएसडीएमए के अपर मुख्यकार्यपालक अधिकारी डा. हृषिकेश भास्कर याशोद ने बताया कि राज्य स्तर पर एआइ युक्त अत्याधुनिक राज्य इमरजेंन्सी आपरेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है। उन्होंने बताया कि युवा आपदा मित्र परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं गृह मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से प्रदेश के 25 जिलों में 29,772 युवाओं को आपदा मित्र का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
साथ ही जल्द ही शहरी व नगरीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। एसडीएमए के उपाध्यक्ष जनरल योगेन्द्र डिमरी ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार के गाइडलाइन के अनुसार ही यूपीएसडीएम के कार्यों को संचालित किया जा रहा है।

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