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    यूपी समाज कल्याण विभाग में आउटसोर्सिंग भर्ती में घोटाला, शिकायत के बाद खुला मामला

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 08:56 AM (IST)

    समाज कल्याण विभाग में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत कोचिंग कोर्स कोआर्डिनेटरों की आउटसोर्सिंग भर्ती में बड़ा घोटाला सामने आया है। आउटसोर्सिंग एजेंस ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। समाज कल्याण विभाग में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत कोचिंग कोर्स कोआर्डिनेटरों की आउटसोर्सिंग से हुई भर्ती में घोटाला सामने आया है। आउटसोर्सिंग एजेंसी ने 48 पदों पर अपात्रों की नियुक्ति कर डाली।

    पिछले दिनों हुई शिकायत के बाद अभिलेखों के सत्यापन में यह गड़बड़ी सामने आई। जिसके बाद विभाग की ओर से आउटसोर्सिंग कंपनी अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ और भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले में विभागीय अधिकारियों की भी मिलीभगत की आशंका है, ऐसे में प्रशासनिक जांच के भी आदेश दिए गए हैं।

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    मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रदेशभर में संचालित कोचिंग सेंटर्स पर कोचिंग कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाती है। इस पद के लिए अभ्यर्थी का यूपी पीसीएस मुख्य परीक्षा पास होना अनिवार्य है। 29 अक्टूबर को इसकी भर्ती में अनियमितता की शिकायत विभाग से की गई थी।

    राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तो सामने आया कि ऐसे अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति दी गई है, जिन्होंने यूपी पीसीएस की मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। कुल 69 अभ्यर्थियों की जांच में केवल 21 अभ्यर्थी ही पात्र पाए गए।

    जांच में अपात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिलाने के लिए फर्जी अभिलेखों का इस्तेमाल करने की भी बात सामने आई है और आउटसोर्सिंग कंपनी को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया।

    मंत्री ने बताया कि विभाग ने थाना गोमती नगर लखनऊ में नियमों का उल्लंघन कर नियुक्तियां कराने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी और संबंधित आवेदकों के खिलाफ षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज और नियम विरुद्ध नियुक्ति के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के भी आदेश दिए गए हैं।

    इस प्रक्रिया में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी दस्तावेज सत्यापन की थी, उनकी भूमिका और लापरवाही की जांच होगी। इसके साथ ही आगे होने वाली आउटसोर्सिंग से होने वाली सभी भर्तियों में आवेदकों के अभिलेखों की जांच और पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। विभाग वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का भी सत्यापन कराएगा।