GI Tag: लखनऊ की रेवड़ी को मिलेगी वैश्विक पहचान, जीआई टैग का रास्ता साफ
GI Tag For Lucknow Rewari: रेवड़ी को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआइ) टैग का आवेदन स्वीकृत हो गया है। देशभर से दिसंबर में ही 66 जीआइ टैग के आवेदन हुए हैं। ...और पढ़ें

चारबाग में रेवड़ी की पैकिंग- जागरण आर्काइव
महेन्द्र पाण्डेय, जागरण, लखनऊ : राजधानी के चारबाग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही "रेवड़ी-रेवड़ी, खुशबूदार, जायकेदार रेवड़ी, लखनऊ की मशहूर रेवड़ी" की गूंज सुनाई देने लगती है। जो लोग मिठाई के शौकीन नहीं हैं, वे भी इस जायके को चखने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
लखनऊ की इस प्रसिद्ध मिठाई को अब वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। यहां की रेवड़ी को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआइ) टैग का आवेदन स्वीकृत हो गया है। देशभर से दिसंबर में ही 66 जीआइ टैग के आवेदन हुए हैं। इनमें कानपुर का प्रसिद्ध बुकनू और मेरठ की गजक भी शामिल हैं।
जीआइ मैन आफ इंडिया के रूप में ख्याति प्राप्त पद्मश्री से सम्मानित डा रजनी कांत ने बताया कि लखनऊ की रेवड़ी, कानपुर का बुकनू और मेरठ की गजक तीनों को कुछ ही महीनों में जीआइ टैग मिल जाएगा। उत्तर प्रदेश 79 जीआइ टैग के साथ भारत में प्रथम स्थान पर है।
इन उत्पादों में लगभग एक करोड़ लोग सीधे जुड़े हैं और करीब एक लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार भी हो रहा है। उत्तर प्रदेश के 30 उत्पादों की जीआइ पंजीकरण प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। वर्ष 2026 में यह आंकड़ा 125 तक पहुंच जाएगा।
दूर-दूर तक प्रसिद्ध रेवड़ी
लखनवी रेवड़ी आसपास ही नहीं, दूर-दूर तक अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। तिल और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई करीब चार-पांच हजार वर्ष पुरानी है। चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने रेवड़ी की दुकानें दिखनी शुरू हो जाती हैं। ये दुकानें प्रसिद्ध रेवड़ी वाली गली के संकेत चिह्न की तरह हैं। लखनऊ की रेवड़ी इसी गली के कारण प्रसिद्ध है। किसी से पूछो, सीधे रास्ता बता देता है। यहां रेवड़ी मात्र 100-120 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल रही है।
दुकानदार रमेश बताते हैं, यहां रेवड़ी ही बनाई जाती है, लेकिन गजक और तिल के लड्डू भी बेचते हैं। चारबाग मार्केट के अलावा राजा बाजार व मौलवीगंज में रेवड़ी के कारखाने हैं। अमीनाबाद, फतेहगंज, गणेशगंज, चौक, चौपटिया, निशातगंज, मूंगफली मंडी, शहर के लगभग सभी रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों सहित माल में भी खूबसूरत पैकिंग के साथ रेवड़ी मिलती है। खाने का स्वाद बढ़ाता बुकनू : चटपटे और खुशबूदार मसाले के मिश्रण रूप में बूकनू खाने का स्वाद बढ़ाता है। यह हाजमे को भी दुरुस्त रखता है। धनिया, जीरा, सौंफ, लहसुन, हींग, काली मिर्च, अदरक आदि को मिलाकर बुकनू बनाया जाता है। अब यह केवल कानपुर तक नहीं, प्रदेश-देशभर में प्रसिद्ध है।
गजक की मिठास है खास
सर्दियों में गजक किसे नहीं पसंद? तिल और गुड़ या चीनी से बनी स्वादिष्ट गजक यूं तो हर जिले में मिलती है, लेकिन मेरठ की गजक का स्वाद हर किसी में नहीं होता। अब गजक काजू, खोया, मलाई और कई अन्य फ्लेवर के लिए भी प्रसिद्ध है। मेरठ में तो गजक रोल जैसी विशेष वैरायटी भी मिलती है।

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