'मेरे पिता को एक माह पहले हार्ट अटैक आया था, क्या मुझे भी खतरा है?' एक्सपर्ट ने दिए ऐसे कई सवालों के जवाब
खराब जीवनशैली और प्रदूषण से युवाओं का दिल कमजोर हो रहा है। वायु और ध्वनि प्रदूषण धमनियों में सूजन, रक्तचाप वृद्धि और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा रहे हैं, ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, लखनऊ। खराब जीवनशैली व गलत खानपान के साथ वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से भी युवाओं का दिल कमजोर हो रहा है। वायु की गुणवत्ता अधिक खराब होने से धमनियों में सूजन एवं सख्त होने और रक्तचाप बढ़ने की परेशानी होती है, जिससे कम उम्र के लोगों में अचानक हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुणा तक बढ़ रहा है।
दरअसल, प्रदूषित हवा के सूक्ष्म कण सीधे खून में पहुंचकर या लगातार शोर से शरीर पर तनाव बढ़ाकर हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं। इसका दुष्प्रभाव बच्चों में भी देखा जा रहा है। पीएम2.5 जैसे बारीक कण फेफड़ों से होते हुए सीधे रक्त में पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं, जिससे धमनियां संकुचित और सख्त हो जाती हैं।
इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल तक आक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है। यही नहीं, वायु और ध्वनि प्रदूषण हृदय गति में बदलाव, उच्च रक्तचाप और हृदय की मांसपेशियों में स्कारिंग भी हो सकती है। यह तथ्य शोध में प्रमाणित भी हो चुके हैं। सरकार के प्रयास के बावजूद संबंधित विभागों की हीलाहवाली के चलते राजधानी में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है।
अनियंत्रित धूल, पराली जलाना, पुराने वाहन और अत्यधिक ट्रैफिक प्रदूषण के प्रमुख कारक हैं, जिससे एक्यूआइ लगातार ''खराब'' या ''गंभीर'' श्रेणी में रहता है। यदि प्रदूषण को कम करने के लिए जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वर्ष 2040 तक सिर्फ हार्ट डिजीज ही नहीं, बल्कि कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों की रफ्तार कई गुणा तक बढ़ जाएंगी। ये जानकारी गुरुवार को दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में केजीएमयू के लारी कार्डियोलाजी विभाग में प्रो. डा. गौरव चौधरी ने दी। उन्होंने कई पाठकों के सवालों के जवाब दिए।
सवाल-जवाब: डा. गौरव चौधरी से पाठकों के प्रश्न
सवाल- क्या ध्वनि प्रदूषण से भी दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है? - राजेश सिंह, अमेठी, 30 वर्ष
-बिल्कुल ऐसा होता है। तेज शोर से शरीर में तनाव बढ़ता है और कई तरह के केमिकल (हार्मोन) रिलीज होते हैं, जो नर्वस सिस्टम और दिल को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से दिल की धड़कन की गति अनियमित होती है और अचानक ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। लगातार शोर वाले इलाके में रहने वाले व्यक्ति की हृदय की मांसपेशियां मोटी और सख्त हो सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। यदि ऐसे क्षेत्रों में रहना मजबूरी है तो एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और खिड़कियां बंद रखें। ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं और खुद भी सचेत रहें।
सवाल- बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं? -नीलम सिंह, बाराबंकी, 45 वर्ष
-बच्चों में हार्ट डिजीज की कई वजह हो सकती हैं, जिनमें कांजेनिटल हार्ट डिजीज, आनुवांशिकी और देर से गर्भधारण मुख्य हैं। कांजेनिटल हार्ट डिजीज जन्म से ही बच्चों को अपनी चपेट में लेती हैं, जिसकी वजह से दिल की बनावट में गड़बड़ी और अन्य असामान्यताएं हो सकती हैं। आनुवंशिक कारक भी बच्चे के दिल पर पर्याप्त प्रभाव डालते हैं, क्योंकि कुछ जेनेटिक म्यूटेशन बच्चों को दिल से जुड़ी समस्याओं का शिकार बना सकते हैं। खासकर 35 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के बच्चों में कांजेनिटल हार्ट डिजीज का खतरा काफी ज्यादा होता है। इन जोखिमों को कम करने और समय रहते बीमारी का पता लगाने के लिए जन्म से पहले सही देखभाल और डाक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है।
सवाल- दिल के मरीजों की परेशानी ठंड में क्यों बढ़ जाती है? इस मौसम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?- राजेंद्र प्रताप सिंह, बाराबंकी, 55 वर्ष
-ठंड में दिल के मरीजों की परेशानी इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि तापमान में गिरावट से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ता है और हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है। ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है और थक्के (ब्लड क्लाट) बनने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है। शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए दिल को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इस मौसम में दो-तीन लेयर में गर्म कपड़े पहनना, नियमित व्यायाम, संतुलित एवं पौष्टिक आहार और दवाएं समय पर लेना ही बचाव के मुख्य उपाय हैं।
सवाल- मेरे पिता को एक माह पहले हार्ट अटैक आया था। क्या मुझे भी खतरा है?- भुवनेश्वर यादव, सीतापुर, 39 वर्ष
-हां, यदि पिता को गंभीर हृदय रोग रहा है तो बेटे को भी इसका खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि दिल की बीमारी 75 प्रतिशत से अधिक आनुवंशिक होती है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली और डाक्टर की सलाह से जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। परिवार में खानपान और आदतों की समानता भी जोखिम बढ़ाती है। जैसे- धूमपान, खराब आहार, या तनाव। इससे बचाव के लिए नियमित तौर पर शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। भोजन में कम तेल, घी, चीनी और नमक का सेवन करें। मौसमी फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज से दिल स्वस्थ होगा।
सवाल- मुझे करीब पांच साल से डायबिटीज और बीपी की परेशानी है। ठंड में बचाव के लिए क्या उपाय करें?- जगदीश द्विवेदी, सुल्तानपुर, 55 वर्ष
-देखिए, डायबिटीज के साथ बीपी हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाता है। क्योंकि दोनों मिलकर रक्त वाहिकाओं और हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे धमनियों में प्लाक जमना, रक्त का प्रवाह बाधित होना और थक्के बनने की संभावना बढ़ती है। ऐसी स्थिति में हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लिहाजा, डायबिटीज एवं बीपी की नियमित दवा लें। मौसम में बदलाव होने पर डाक्टर की सलाह जरूरी है। प्रतिदिन व्यायाम करें। बाहर की वस्तुओं को खाने से परहेज करें। धूमपान और शराब का सेवन नुकसानदायक है।
सवाल- मुझे 2019 में हार्ट अटैक आया था। एंजियोप्लास्टी हुई थी। पिछले कुछ दिनों से चलने या सीढ़ी चढ़ने पर सांस फूलती है। - प्रीति, लखनऊ, 57 वर्ष
-पानी और नमक की मात्रा सीमित रखें। शुगर नियंत्रित नहीं है तो इंडोक्राइनोलाजिस्ट को दिखाएं। ठंड कम होने पर लारी कार्डियोलाजी में भी दिखाएं। एक बार ईको जांच करना चाहिए। हो सकता है कि आपकी हार्ट की पंपिंग कमजोर हो।
सवाल- मैं नियमित, लेकिन संतुलित मात्रा में शराब का सेवन करता हूं। कभी-कभी बाएं कंधे के पास दर्द और भारीपन होता है। क्या यह हार्ट डिजीज का लक्षण है?- अभिषेक, लखनऊ, 37 वर्ष
-शराब से सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि लिवर को भी गंभीर खतरा होता है। यह पूरे शरीर को प्रभावित करती है, जिससे फैटी लिवर, अल्कोहलिक हेपेटाइटिस, सिरोसिस (लिवर का सख्त होना) जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। अभी आपकी उम्र बहुत कम है, इसलिए शराब छोड़ने का संकल्प लें।
ठंड में हार्ट एवं अस्थमा रोगी इन बातों का रखें ध्यान
- दो-तीन लेयर में गर्म कपड़े पहनें
- डायबिटीज व बीपी के रोगी हैं तो नियमित दवा लें और डाक्टर से सलाह भी जरूरी है
- अधिक वसा, नमक और चीनी वाले भोजन से बचें। मौसमी फल, हरी सब्जियां और साबूत अनाज खाएं
- तनाव और अधिक शराब के सेवन से बचें
- खूब पानी पिएं और गर्म पेय (जैसे हर्बल चाय) का सेवन करें
- बहुत अधिक ठंडे तापमान में बाहर जाने से बचें
- प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें
- इस मौसम में गुनगुना पानी से नहाएं। पहले पैर और शरीर पर पानी डालें, फिर सिर पर
- ठंड में बाहर न जा पाने पर घर में ही सीढ़ियां चढ़ें, योग करें, या डांस करें। इससे रक्त संचार और शुगर नियंत्रित रहेगी
हार्ट अटैक के लक्षण
हार्ट अटैक के लक्षणों में सीने में दबाव, जकड़न, दर्द या भारीपन महसूस होना (जो 15 मिनट से अधिक रहे), बाहों, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक दर्द फैलना, सांस लेने में दिक्कत, ठंडा पसीना आना, मतली, उल्टी, चक्कर आना और अत्यधिक थकान शामिल हैं। कभी-कभी अपच या सामान्य थकान जैसे लग सकता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

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