लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी और स्वतंत्र दिवस से पूर्व सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर आपित्तजनक संदेशों के बीच अलग-अलग नंबरों से आ रही वह कॉल भी जुड़ गई है, जिसमें एक ऑडियो रिकार्डिंग के जरिए महौल बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। इस कॉल को लेकर लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर भी दर्ज की गई है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद खासकर कुछ असमाजिक तत्व माहौल खराब करने की साजिश कर रहे हैं। ऐसे में जन्माष्टमी व स्वतंत्रता दिवस पर शांति व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश में खुफिया तंत्र को अलर्ट कर दिया गया है। खासकर एक बार फिर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) व सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) समेत कुछ अन्य संगठनों के सदस्यों व उनकी गतिविधियों पर खुफिया एजेंसियों की निगाहें गड़ गई हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर 15 अगस्त को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।

अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद खासकर कुछ असमाजिक तत्व माहौल खराब करने की साजिश कर रहे हैं। ऐसे में जन्माष्टमी व स्वतंत्रता दिवस पर शांति व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने इन अवसरों पर कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के अलावा संदिग्धों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर सोशल मीडिया पर पुलिस ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) भी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद से ही पीएफआइ व अन्य संगठनों पर निगाह गड़ाए है।

ध्यान रहे, दिसंबर 2019 में पुलिस ने पीएफआई को प्रतिबंधित किए जाने को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था। फरवरी माह में पुलिस ने 13 जिलों में पीएफआइ के करीब 133 सदस्यों को पकड़ा था। पांच अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन होने के बाद सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक माहौल बिगाडऩे के लिए आपत्तिजनक संदेश वायरल करने वाले 16 आरोपितों को गिरफ्तार भी किया गया था। अब उनसे जुड़े अन्य लोगों की गतिविधियों पर भी निगाह रखी जा रही है।

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