PGI के डॉक्टरों के लिए आकर्षण बनेे निजी अस्पताल, VRS लेने की लगी होड़ Lucknow News
एसजीपीजीआइ लखनऊ से अब 57 डॉक्टर समय से पहले ले चुके हैं वीआरएस। कॉरपोरेट अस्पताल आने में जाने में लगे डॉक्टर। ...और पढ़ें

लखनऊ, जेएनएन। संजय गांधी पीजीआइ में रिटायरमेंट के करीब पहुंचने वाले प्रोफेसर जल्द से जल्द ठिकाना तलाशने में लग गए हैं। नौकरी के बचे कुछ साल से पहले वीआरएस लेकर आगे के लिए राह खोज रहे हैं। यह राजधानी में खुल रहे कारपोरेट अस्पतालों में काम के लिए लगातार बात कर रहे हैं। उनका मानना है कि रिटायरमेंट से पहले गए तो मार्केट वैल्यू ठीक रहेगी, बाद में जाने से वैल्यू कम हो जाएगी। साफ शब्दों में कहें तो वेतन कम मिलेगा। संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य का कहना है कि पूरी जिंदगी सरकारी संस्थान में सेवा दी, लेकिन रिटायरमेंट के बाद खाली बैठने से अच्छा है कि कमाई के साथ व्यस्तता बनी रहे। इस कारण वीआरएस लेने की सोच रहे हैं, जिसके लिए आवेदन भी कर दिया है। हमारे जाने से विभाग पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि विभाग में पहले से अच्छी संख्या में संकाय सदस्य हैं। संस्थान के कुछ युवा सदस्य भी जाने की सोच रहे हैं।
तीन रिटायरमेंट के करीब बाकी के पास वक्त
तीन संकाय सदस्य ऐसे हैं जिनका रिटायरमेंट दो से तीन साल बचा है। संस्थान में रिटायरमेंट की अविध 65 वर्ष है। यह पहले ही सुरिक्षत होना चाहते हैं, इसलिए वीआरएस लेने की कोशिश में हैं। दो अन्य संकाय सदस्य हैं जिन्होंने संस्थान छोडऩे का मन बनाया है वे अभी काफी युवा हैं, लेकिन व्यक्तिगत परेशानी के कारण जाना चाहते हैं।
निजी अस्पताल हैं आकर्षण
संस्थान 1986 से काम कर रहा है तब से लगातार संस्थान विशेषज्ञ समय से पहले संस्थान छोड़ चुके हैं। अब तक 57 से अधिक संकाय सदस्य पीजीआइ को छोड़कर दूसरे संस्थानों में जा चुके हैं। अधिकतर लोग निजी क्षेत्र में गए हैं। हाल में इटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट, प्रो. आरवी फड़के ने वीआरएस लेकर एक निजी अस्पताल में ज्वाइन किया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
निदेशक, प्रो. राकेश कपूर का कहना है कि वीआरएस लेना किसी का भी मूल अधिकार है। बांधकर किसी से काम नहीं कराया जा सकता है। काम करने के लिए मनोभावना होनी चाहिए। 65 वर्ष की आयु के बाद जाना है तो कोई पहले विकल्प की तलाश करता लेता है। किसी के जाने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। अब तक 57 से अधिक सदस्य समय से पहले गए, लेकिन विकास की प्रक्रिया कहीं नहीं रुकी। नियमानुसार शासन को आवेदन भेजा जाएगा।

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