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    'एक देश-एक पंचांग' के लिए बनेगा प्लेटफॉर्म, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की वेबसाइट से प्रिंट करा सकेंगे कैलेंडर

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 06:32 AM (IST)

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय 'एक देश एक पंचांग' की पहल कर रहा है। इसकी वेबसाइट पर एक लिंक उपलब्ध होगा, जिससे विद्वतजन अपने क्षेत्र के अक्षांश-देशांत ...और पढ़ें

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    महेन्द्र पाण्डेय, लखनऊ। देश में अब व्रत-त्योहारों या तिथियों में मतभिन्नता नहीं रहेगी। सनातन धर्मावलंबी एक ही पंचांग को मानें, इसके लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक प्लेटफार्म देने की पहल की है। विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट sanskrit.nic.in पर 'एक देश एक पंचांग' का लिंक उपलब्ध कराएगा। विद्वतजन को इसका निश्शुल्क आइडी-पासवर्ड दिया जाएगा। वे उससे लागइन कर अपने क्षेत्र के अक्षांश एवं देशांतर को दर्ज कर पंचांग प्रिंट कर सकेंगे।

    इसको बेच भी सकेंगे। काशी व उज्जैन के विद्वत परिषद ने 'एक देश एक पंचांग' के लिए प्रयास किया, किंतु अभी तक इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं बढ़ाए जा सके। अब केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के निदेशक व वरिष्ठ ज्योतिष आचार्य सर्वनारायण झा ने इसकी रूपरेखा बनाई है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय इसके लिए अखिल भारतीय पंचांग समिति बना रहा है। इस समिति में देश के सभी पंचांगकारों को जोड़ा जाएगा।

    उन्हें वर्ष में एक या दो बार विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया जाएगा। व्रत-त्योहार, तिथि आदि पर मतैक्यता का प्रयास किया जाएगा। इससे पूरे देश के पंचांग की गणित एक ही रहेगी और किसी भी तिथि में भेद नहीं होगा। प्रो. झा ने बताया कि हमारे देश में सूर्य के सिद्धांत के आधार पर पंचांग बनाया जाता रहा है, लेकिन विद्वानों ने इसमें सहूलियत के लिए सारिणी विकसित कर दी थी। धीरे-धीरे सूर्य के सिद्धांत वाले पंचांग का लोप हो गया और सारिणी के आधार बने पंचांग प्रचलन में आ गए। एक बार फिर हम सूर्य के सिद्धांत वाले पंचांग को अपनाने जा रहे हैं।

    समय में अंतर, पर तिथि वही रहेगी

    प्रो. झा ने बताया कि सूर्य के सिद्धांत के आधार पर एक ही गणित से पंचांग तैयार होंगे। हर क्षेत्र के अक्षांश और देशांतर में कुछ अंतर होता है। इससे व्रत-त्योहार के शुभ मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन तिथि नहीं बदलेगी। इससे सनातन को मानने वालों को पूजा-अनुष्ठान आदि में आसानी होगी।

    तीन महीने मेंपूरी हो जाएगी प्रक्रिया

    प्रो. झा ने बताया कि करीब एक दशक पहले मैंने सूर्य के सिद्धांत के आधार पर पंचांग तैयार कर देश के सभी विद्वतजन को एक मंच पर लाने का प्रयास शुरू किया था, लेकिन कुछ कारणवश पूरा नहीं हो पाया। अब इसमें तेजी से काम हो रहा है। तीन महीने में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इसी वर्ष से एक गणित के आधार बने पंचांग उपलब्ध हो जाएंगे।