अस्पतालों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए तैनात होंगे नोडल आफिसर
Terror Of Stray Dogs: स्वास्थ्य विभाग को एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने व नोडल आफिसर तैनात करने ह ...और पढ़ें

आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए नोडल अफसर
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ: निजी व सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए नोडल अफसर तैनात किए जाएंगे। इनकी जिम्मेदारी अस्पताल परिसर में कुत्तों को घुसने से रोकने के लिए गेट, चाहरदीवारी, बाड़ की व्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा।
कुत्तों के काटने के बाद लगाए जाने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता पर भी इन्हें नजर रखनी होगी। महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉक्टर रतन पाल सिंह सुमन ने अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस), मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), मंडलीय अपर निदेशक चिकित्सा को सुप्रीम कोर्ट के सभी जरूरी दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।
महानिदेशक ने राजकीय व निजी क्षेत्र के सभी अस्पतालों को उन मरीजों का पूरा डाटा रखने के लिए कहा है, जिन्हें कुत्तों ने काटा है। इसमें पालतू कुत्ते और आवारा कुत्ते की काटने की जानकारी अलग-अलग दर्ज करनी होगी। नोडल अधिकारी नियुक्त करने व अन्य व्यवस्थाएं दुरुस् करने की जानकारी सभी अस्पतालों को महानिदेशालय को उपलब्ध करानी होगी। डॉक्टर सुमन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से आवारा कुत्तों और पशुओं के प्रबंधन के लिए जारी दिशा-निर्देशों के तहत ये व्यवस्था की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग को एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने व नोडल आफिसर तैनात करने हैं। इसके लिए सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। कार्रवाई की रिपोर्ट भी आनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम को आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए निकायों में डाग रिस्पांस टीम बनाने, हेल्पलाइन नंबर और राज्य स्तरीय टोल फ्री नंबर 1533 प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।
इसके अलावा सभी जिलों में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र (एबीसी सेंटर) भी बनाने के लिए कहा गया है। जहां आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी की जाएगी। कुत्तों के व्यवहार पर भी नजर रखने के लिए कहा गया है। यदि कोई आवारा कुत्ता कई लोगों को काटता है तो, उसे आजीवन नगर निगम के बनाए आश्रय स्थल में रखा जाएगा। जिससे वह किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचा सके।

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