MLC अशोक कटारिया पर दर्ज केस होगा वापस, MP/MLA कोर्ट ने मुकदमा वापसी का प्रार्थना पत्र किया स्वीकार
पूर्व परिवहन मंत्री व एमएलसी अशोक कटारिया पर 2005 के विधान भवन घेराव मामले में दर्ज मुकदमे की वापसी का प्रार्थना पत्र एमपी/एमएलए कोर्ट ने आंशिक रूप से ...और पढ़ें

विधि संवाददाता, लखनऊ। विधान भवन घेराव के दौरान सरकारी काम में व्यवधान डालने व बलवा करने के मामले में आरोपित बनाए गए पूर्व परिवहन मंत्री, भाजपा नेता व एमएलसी अशोक कटारिया और अन्य पर दर्ज मुकदमे की वापसी के प्रार्थनापत्र को एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण ने आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। मामले को पुनः सुनवाई के लिए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट में भेजने का आदेश दिया है।
इस संबंध में हजरतगंज थाने की पुलिस ने 22 नवंबर 2005 को मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार, बिजनौर के अशोक कटारिया और उनके सैकड़ों साथियों ने तत्कालीन सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सरकारी काम में व्यवधान उत्पन्न करने सहित कई कानूनी धाराओं का उल्लंघन किया था, जिससे सरकार को आर्थिक हानि हुई और लोक सेवकों के कार्यों में बाधा डाली गई थी।
मार्च 2024 को कर दिया था खारिज
सरकार ने धारा 321 के अंतर्गत दिए गए प्रविधानों के तहत आरोपितों के विरुद्ध प्रचलित मुकदमे को वापस लेने का प्रार्थना पत्र मजिस्ट्रेट कोर्ट में दाखिल किया था, जिसे एक मार्च 2024 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर कर आदेश को चुनौती दी। न्यायालय के समक्ष राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त विशेष अधिवक्ता मोहित मिश्रा ने पक्ष रखते हुए बताया कि मुकदमा तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक विद्वेषवश लिखवाया था।
मुकदमे की विवेचना के दौरान जांच अधिकारी को किसी भी अभियुक्त के पास से न तो कोई हथियार मिला और न ही कोई विस्फोटक पदार्थ बरामद हुआ था। न्यायालय ने याचिका को आंशिक रूप से इसे स्वीकार करते हुए उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित यूनियन आफ इंडिया बनाम अश्वनी कुमार उपाध्याय के आदेश का हवाला देते हुए मुकदमे को पुनः सुनवाई के लिए भेजने का आदेश दिया है।

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