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    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर होगा बड़ा बदलाव, 7 करोड़ का ये है मास्टरप्लान

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 05:34 AM (IST)

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे को हरा-भरा बनाने के लिए 45 किमी ग्रीन फील्ड क्षेत्र में 46 हजार पेड़ लगाए जाएंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआ ...और पढ़ें

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    अंशू दीक्षित, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे को हरियाली से भरपूर बनाने के लिए 46 हजार पेड़ सिर्फ ग्रीन फील्ड क्षेत्र (बनी से आजाद चौक तक) में लगाए जाएंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और वन विभाग के बीच हुए समझौते के बाद इस पर काम भी शुरू हो गया है। खासबात होगी कि जब तक पेड़ बड़े नहीं हो जाएंगे, उनकी देखरेख वन विभाग करेगा।

    उत्तर प्रदेश का यह पहला एक्सप्रेस वे होगा, जहां एनएचएआइ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ लगवाने जा रहा है। बांस, पाकड़, बरगद, पीपल जैसे वृक्ष से यात्रियों को बेहतर पर्यावरण मिलेगा। एनएचएआइ इस प्रोजेक्ट पर सात करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। एक्सप्रेसवे के 45 किमी. रूट पर पौधरोपण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक हर किमी पर 1022 पेड़ लगाए जाएंगे, सिर्फ ग्रीन फील्ड पर।

    वहीं एलीवेटेड रोड के मार्ग पर 222 पेड़ हर किमी. पर कार्यदायी संस्था लगवाएगी। उत्तर प्रदेश का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे अन्य एक्सप्रेस से हरियाली के मामले में भी अलग होगा। यहां ग्रीन फील्ड पर करीब 46 हजार पेड़ और एलीवेटेड वाले मार्ग पर चार हजार पेड़ लगाए जाएंगे। इसको लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) का वन विभाग व एक्सप्रेस वे बना रही कार्यदायी संस्था के साथ एलीवेटेड मार्ग पर पौधे लगाने का समझौता हुआ है।

    वन विभाग बनी से लेकर आजाद चौक तक पेड़ लगाएगा। एनएचएआइ ने वन विभाग से समझौता किया है कि वह एक्सप्रेस वे के 45 किमी. रूट पर पेड़ों का पांच साल तक रखरखाव करे। पेड़ों की सिंचाई के लिए छह सबमर्सिबल बनी से आजाद चौक के बीच में लगाएगा।

    जगह-जगह पानी की टंकियां रखी जाएंगी और सबमर्सिबल को चलाने के लिए रूफ टाप सोलर बैटरी चलित लगाए जाएंगे। यही नहीं समझौते में वन विभाग सिंचाई के लिए वाहनों की व्यवस्था भी इन्हीं सात करोड़ रुपये से करेगा। फिर टैंकरों से पानी भरकर सिंचाई कराएगा।

    बता दें कि लखनऊ से कानपुर के बीच निर्माणाधीन एक्सप्रेस वे छह लेन का है, लेकिन ग्रीन फील्ड जो 45 किमी. का है, उसके बगल में कम से कम तीन से चर लेन की जगह और छोड़ी गई है। इसी स्थान पर एनएचएआइ पौधरोपण कराएगा। इस स्थान को प्राधिकरण ने बैरिकेडिंग भी करवा दिया है। अफसरों के मुताबिक पेड़ बड़े हो जाने के बाद यह स्थान किसी भी हिल स्टेशन से कम नहीं लगेगा। क्योंकि इस 45 किमी. रूट के दोनों तरफ कंक्रीट का जंगल न होकर हरियाली है।

    एक्सप्रेस वे शुरू होने से पहले लक्ष्य होना है पूरा 
    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे का काम मार्च 2026 में पूरा करने का दावा किया जा रहा है। इस दौरान एनएचएआइ और वन विभाग को इस लक्ष्य को पूरा करना है। प्राधिकरण के अफसरों ने पेड़ों की सिंचाई के लिए बोरिंग, रूफ टाप सोलर से जुड़े काम को करवाने के लिए काम शुरू करने की बात कही है। एनएचएआइ का प्रयास है कि एक्सप्रेस वे चलने से पहले यह काम पूरा कर लिया जाए।