'कागजी प्रोग्रेस नहीं, जमीनी रिजल्ट चाहिए', लाइट हाउस प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति पर प्रमुख सचिव का फूटा गुस्सा
प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरू प्रसाद ने शहरी विकास योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कागजी उपलब्धियों के बजाय जमीनी परिणामों पर जोर देते हुए लंबित परिय ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। शहरी विकास योजनाओं की प्रगति का आकलन करते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरू प्रसाद ने शुक्रवार को राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि कागजी उपलब्धियों के बजाय जमीनी परिणाम ही अब मूल्यांकन का आधार होंगे। उन्होंने लंबित परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के प्रथम चरण में लंबित 64 हजार से अधिक आवासों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कराया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की समीक्षा के दौरान निदेशक सूडा अपूर्वा दुबे ने बताया कि अब तक 23 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से चार लाख आवेदनों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि जहां परियोजनाओं की प्रगति धीमी है, वहां प्राधिकरणों, निजी डेवलपर्स, नगर निगमों और हाउसिंग बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाई जाए। लाइट हाउस प्रोजेक्ट (एलएचपी) की प्रगति पर असंतोष जताते हुए प्रमुख सचिव ने अवशेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। प्रदेश के 40 जिलों में संचालित 50 शक्ति रसोई की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने सुझाव दिया कि इसका संचालन एयरपोर्ट और मेट्रो स्टेशनों पर किया जाए।
मुख्यमंत्री नगरीय अल्पविकसित व मलिन बस्ती योजना को लेकर कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निदेशक सूडा ने विभाग में रिक्त पदों के कारण योजनाओं को लागू करने में हो रही देरी की जानकारी भी दी, जिस पर प्रमुख सचिव नगर विकास ने समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।

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