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    सेवानिवृत्त अधिकारी को 24 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर लगाया 90 लाख का चूना, देश के इन राज्यों के खातों में पैसे कराए ट्रांसफर 

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 06:00 AM (IST)

    साइबर जालसाजों ने सेवानिवृत्त 73 वर्षीय अधिकारी अमरजीत सिंह को मनी लांड्रिंग मामले में जेल भेजने की धमकी देकर 1 से 24 दिसंबर के बीच डिजिटल अरेस ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। साइबर जालसाजों ने वित्त विभाग से सेवानिवृत्त 73 वर्षीय अधिकारी अमरजीत सिंह को मनी लांड्रिंग के मामले में परिवार समेत जेल भेजने के नाम पर फंसाया। इसके बाद एक से 24 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपये ठग लिए। पिता को पेरशान देख बेटे को संदेह हुआ तो उन्होंने जानकारी करने का प्रयास किया। इसपर पहले तो पीड़ित ने कुछ नहीं बताया, लेकिन दबाव बनाने पर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।

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    इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना बृजेश कुमार यादव के मुताबिक मामले 15 लाख रुपये जालसाजों के खाते में फ्रीज कराया गया है।कानपुर रोड स्थित एलडीए कालोनी सेक्टर जी में अमरजीत सिंह परिवार के साथ रहते हैं। उनके बेटे अमरप्रीत सिंह बेंगलुरु में नौकरी करते हैं।

    एक दिंसबर को अमरजीत सिंह के पास एक वीडियो काल आई। काल करने वाले ने बताया कि वह मुंबई साइबर क्राइम सेल का अफसर गिरीश कुमार बोल रहा है। उसने अमरजीत सिंह पर मनी लांड्रिंग केस में संलिप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि आपके खिलाफ मुंबई साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तारी का वारंट जारी है। बैंक खातों में मनी लांड्रिंग के रुपयों के लेनदेन का हवाला दिया।

    अमरजीत के विरोध पर उन्हें और पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी। वाट्सएप पर कोर्ट का वारंट भेजा। वारंट देखकर अमरजीत सिंह डर गए। यह देख जालसाज ने उन्हें और डराया। इसके बाद अमरजीत से उनके बैंक खातों और अन्य आर्थिक स्रोतों की जानकारी ली। जालसाज ने अमरजीत से कहा कि हमारी टीम जो कहे वही करते जाइए, नहीं तो पूरे परिवार को जेल भेज दूंगा। आपके रुपयों की जांच की जा जाएगी। एक करोड़ रुपये आपको हमारे खाते में ट्रांसफर करने होंगे। जांच पूरी होने के बाद यह रुपये आपको वापस कर दिए जाएंगे। इसके बाद अमरजीत ने जालसाजों के बताए बैंक खातों में करीब 90 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

    परिवार से भी छिपाया मामला

    इंस्पेक्टर के मुताबिक अमरजीत सिंह ने अपने किसी परिवारीजन को डिजिटल अरेस्ट की जानकारी नहीं दी। 25 दिसंबर को अमरजीत सिंह छत पर खड़े होकर किसी से फोन पर बात कर रहे थे। वह बहुत घबराए हुए थे। बेटे अमरप्रीत ने देखा तो शक हुआ। उन्होंने पूछताछ की तो अमरजीत सिंह टाल मटोल करने लगे। इसके बाद 25 दिसंबर की शाम अमरजीत सिंह परिवार के साथ एक रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे। वह उस समय भी घबराए हुए थे। पूछने पर कोई जानकारी नहीं दी। घर लौटने पर काफी दबाव बनाया तब उन्होंने सारी बात बताई।

    आनलाइन किया ट्रांसफर, दबाव में एफडी भी तोड़ी

    अमरजीत सिंह ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जालसाजों के बताए गए बैंक खाते में आनलाइन रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद बैंक जाकर म्यूचुअल फंड तोड़वा दिए। इसके अलावा पंजाब नेशनल और अन्य बैंकों के खाते से रुपये निकालकर जालसाजों के खाते में ट्रांसफर किए थे। इंस्पेक्टर साइबर क्राइम बृजेश यादव के मुताबिक जालसाजों ने ओडिशा, बंगाल और झारखंड व कुछ अन्य राज्यों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराए हैं।