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अब अपने मकान-दुकान का खुद एक क्लिक में पास कीजिए नक्शा, LDA ने नए साल पर दी बड़ी सौगात

Published: Thu, 01 Jan 2026 05:22 PM (IST)

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 'फास्टपास' प्रणाली लागू की है, जिससे अब भूखंड स्वामी 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एलडीए ने 'फास्टपास' प्रणाली लागू की, मिलेगी बड़ी राहत।

  2. भूखंड स्वामी अब खुद ऑनलाइन नक्शा स्वीकृत कर सकेंगे।

  3. 100 वर्गमीटर आवासीय, 30 वर्गमीटर व्यावसायिक भवनों के लिए।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। नए साल में घर या दुकान बनवाने की सोच रहे हैं तो अब नक्शा पास कराने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। भूखंड स्वामी खुद ही अभिलेख प्रमाणित करके आनलाइन अपलोड करके मानचित्र भी स्वीकृत कर सकेंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नए बिल्डिंग बायलाज के तहत फास्ट ट्रैक सिस्टम ‘फास्टपास’ लागू कर दिया है।

फास्टपास प्रणाली के तहत 100 वर्गमीटर क्षेत्रफल तक के आवासीय व 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक (कमर्शियल) भवनों का मानचित्र संपत्ति के स्वामी खुद पास कर सकेंगे। इसके लिए भूखंड स्वामी को map.up.gov.in पर आनलाइन आवेदन करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और सरल रखी गई है।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि नए साफ्टवेयर के जरिए भूखंड स्वामी को अपने मकान व दुकान का नक्शा स्वयं पास करने के लिए उन्हें आनलाइन आवेदन करना होगा और चंद मिनटों में मानचित्र स्वीकृत होगा। इस नई व्यवस्था से शहर में अपना मकान व दुकान बनाने जा रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। मानचित्र पास कराने की प्रक्रिया में होने वाली देरी और अनावश्यक परेशानी भी खत्म होगी।

एलडीए उपाध्यक्ष ने बताताया, मानचित्र पास कराने के दौरान यह अनिवार्य होगा कि भूखंड का लैंड यूज मास्टर प्लान के अनुरूप हो। साथ ही आवेदन में भूखंड की सटीक लोकेशन, आसपास की सड़कों की लंबाई व चौड़ाई, प्रस्तावित भवन की ऊंचाई, कवर्ड एरिया, फ्रंट, साइड और रियर सेटबैक, प्रवेश और निकास द्वार व पार्किंग का पूरा विवरण देना होगा। पोर्टल पर मानचित्र के साथ पूरा विवरण देते ही चंद ही मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा व आवेदक को स्वतः प्रमाणित मानचित्र व सर्टिफिकेट मिल जाएगा।

ऐसे करें आवेदन
आवेदन की शुरुआत पोर्टल पर नाम व मोबाइल नंबर रजिस्टर करने से होगी। इसके बाद लागिन आइडी और पासवर्ड बनाकर आवेदक अपना मानचित्र अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर ही गणना के अनुसार देय शुल्कों के भुगतान की सुविधा होगी। खास बात यह है कि आवेदन सबमिट होते ही सिस्टम स्वतः मानकों के आधार पर मानचित्र की जांच करेगा।