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    लखनऊ में बंदरों के आतंक से परेशान लोग, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 05:55 PM (IST)

    मोहनलालगंज के नगराम स्थित अचलीखेड़ा गांव में हजारों बंदरों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। बंदरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, बच्चे घरों में कैद ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, मोहनलालगंज (लखनऊ। सामान्यतः बंदर तो सब जगह है लेकिन मोहनलालगंज तहसील के नगराम स्थित अचलीखेड़ा गांव में समस्या थोड़ी जटिल है यहां दो हजार से अधिक की आबादी के बीच अचानक से हजारों बंदर हो गए जिन्होंने लोगों का जीना,रहना और घर से निकलना तक दूभर कर दिया। बच्चे घरों में कैद है लाल मुंह वाले बंदरों ने कई लोगों को काटकर घायल किया है ग्रामीणों शिकायत लेकर भटक चुके लेकिन कोई सुन नहीं रहा। परेशान ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन तक में शिकायत लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    अचलीखेड़ा निवासी सुनील शर्मा सहित ग्रामीणों की शिकायत के बाद दैनिक जागरण ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या जानी,इस दौरान कई जगहों पर बंदरों का झुंड उत्पात मचाता हुए दिखाई पड़े। लोग छतों पर सूखने के फैलाए गए अपने अनाज के बचाव के लिए हाथ में डंडे लेकर घूमते हुए नजर आए।

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    शिकायतकर्ता सुनील शर्मा ने बताया कि कुछ ही महीने में उनके गांव में हजारों की संख्या में लाल मुंह वाले बंदर आ गए जो पहले कभी यहां नहीं थे। कई गाड़ियों से कही दूसरी जगह से लाकर उन्हें गांव के बाहर छोड़ दिया गया जो अब उनकी परेशानी का सबब बन गए। बंदर उन्हें दो बार बंदर काट चुके है पत्नी ज्योति और भाभी माधुरी को भी दो महीने पहले बंदर काट चुके है।

    किसान तेज नारायण ने बताया कि काफी संख्या में बंदर है जो झुंड में चलते है। घरों में फैले अनाज का नुकसान कर रहे,कपड़े फाड़ देते है फसलों को नुकसान पहुंचा रहे जहां अनाज पड़ा होता वहां ही बंदरों का झुंड आ जाता है। बंदर गलियों में घूम रहे है बड़े लोग डंडे लेकर घूमने पर मजबूर है गांव में सन्नाटा पसरा है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की टंकी को बचाव के लिए कांटे लगाने पड़े है।

    शिकायत दर शिकायत नतीजा शून्य

    सुनील शर्मा ने बताया कि वह शहर में नौकरी करते है लेकिन बंदरों के कारण ड्यूटी नहीं जा पाए। बंदरों को कारण उन्होंने वन विभाग से शिकायत कि तो उन्हें नगर निगम लखनऊ भेज दिया गया वहां से उन्हें बैरंग लौटा दिया गया। जनप्रतिनिधि से निवेदन किया साथ ही 1076 पर शिकायत की लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। उन्हें ग्रामीणों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री पत्र भेजकर समस्या के निदान का निवेदन किया है।