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    ऑनलाइन टास्क और निवेश का झांसा देकर दो लोगों से ऐंठे 58.82 लाख रुपये, टेलीग्राम एप के जरिए किया था संपर्क

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:52 PM (IST)

    लखनऊ में साइबर ठगों ने ऑनलाइन टास्क और निवेश का लालच देकर दो व्यक्तियों से 58.82 लाख रुपये ठग लिए। एक पीड़ित को 'रेंट रेडफिन ट्रेडिंग ऐप' पर छोटे टास् ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। ऑनलाइन टास्क और निवेश का झांसा देकर साइबर ठगों ने दो लोगों से 58.82 लाख रुपये ऐंठ लिए। ठगों ने पहले छोटे टास्क पूरे कराने के बाद खाते में पैसे डालकर भरोसा जीता और फिर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली। वहीं, दूसरे को टेलीग्राम एप के जरिए संपर्क कर निवेश के नाम पर ठगी की। पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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    औरैया अछल्दा सकरावा निवासी अनिल कुमार कैंट इलाके में रहते हैं। अनिल के मुताबिक 14 अगस्त 2025 को उनके वाट्सएप नंबर पर एक मोबाइल नंबर से संपर्क कर रेंट रेडफिन ट्रेडिंग एप पर ऑनलाइन काम करने का आफर दिया गया। ठगों ने लिंक भेजकर रजिस्ट्रेशन कराया और एक टास्क पूरा कराने के बाद 761 रुपये उनके खाते में ट्रांसफर कर दिए।

    इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच देकर अलग-अलग तिथियों में कई यूपीआइ आइडी और बैंक खातों में पैसे जमा कराए गए। 17 अगस्त से 28 अगस्त 2025 के बीच पीड़ित से एक लाख, तीन लाख, दस लाख से लेकर बारह लाख रुपये तक की रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाई गई। कुल मिलाकर पीड़ित से 41 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की गई।

    वहीं, बिजनौर रोड स्थित स्वप्निल सौभाग्य सोसाइटी निवासी शशांक शुक्ला के मुताबिक वह निजी मेडिकल कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि डार्विनेक्स ग्लोबल कंपनी से जुड़ा बताते हुए एक युवती ने टेलीग्राम ऐप पर खाता खुलवाया और लिंक के जरिए निवेश कराया।

    पीड़ित ने टेलीग्राम ऐप के माध्यम से कुल 9.05 लाख रुपये निवेश किए, जिस पर ऐप में 18,885 डालर का मुनाफा दिखाया गया। कुल राशि 26,987.05 डालर दर्शाई गई। जब पीड़ित ने रकम निकालने का प्रयास किया तो ठगों ने 30 प्रतिशत टैक्स के नाम पर 4.81 लाख रुपये की मांग की।

    टैक्स काटकर भुगतान करने की बात कहने पर ठगों ने आइडी ब्लाक करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित से 6.77 लाख रुपये और वसूल लिए गए। इस तरह कुल 15.82 लाख रुपये डार्विनेक्स कंपनी के नाम पर जमा करा लिए गए, लेकिन पीड़ित को अब तक एक भी रुपया वापस नहीं मिला। इंस्पेक्टर साइबर क्राइम बृजेश कुमार यादव के मुताबिक नंबरों को ट्रेस कर डिटेल जुटाई जा रही है।