बर्ड फेस्टिवल 2026 के लिए यूपी सरकार ने शहर कर लिया फाइनल, तारीख भी हुई तय
उत्तर प्रदेश सरकार 2 फरवरी को विश्व वेटलैंड दिवस पर ललितपुर के महावीर स्वामी वन्यजीव विहार में बर्ड फेस्टिवल आयोजित करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य वेटलैंड ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार इस बार विश्व वेटलैंड दिवस (दो फरवरी) पर बर्ड फेस्टिवल का आयोजन ललितपुर में करने जा रही है। महावीर स्वामी वन्यजीव विहार में होने वाले इस कार्यक्रम में देश भर से पक्षी प्रेमियों, पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। पिछले वर्ष बर्ड फेस्टिवल प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान हुआ था। वन विभाग ने बर्ड फेस्टिवल को सफल बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बर्ड फेस्टिवल के आयोजन का उद्देश्य वेटलैंड संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता और पक्षी संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। इसमें बर्ड वाचिंग, जनजागरूकता कार्यक्रम और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बर्ड फेस्टिवल से ललितपुर को पर्यावरण पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ संरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश भी जाएगा।
दुनिया में करीब 11 हजार से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 1300 से अधिक प्रजातियां भारत में देखने को मिलती हैं। प्रदेश में ही 350 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। ललितपुर में स्थित महावीर स्वामी वन्यजीव विहार बुंदेलखंड की पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यहां पर 176 प्रजातियों के पक्षी दिखाई देते हैं। इनमें 143 यहां के व 33 प्रवासी पक्षी हैं।
इनमें इंडियन रोलर, इंडियन ब्लैक वुडपेकर, ग्रे-हेडेड बुलबुल, व्हाइट बेल्लिड ब्लू-फ्लाईकैचर, गिद्ध, बार्न उल्लू आदि प्रमुख हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमूरी कहती हैं कि बर्ड फेस्टिवल के लिए तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। जल्द ही कार्यक्रम के अंतिम रूप देकर देश-विदेश के पक्षी प्रेमियों को आमंत्रित किया जाएगा। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
क्या होते हैं वेटलैंड
वेटलैंड (आर्द्रभूमि या नमभूमि) वह क्षेत्र है, जहां उथले पानी के जीव जंतु एवं वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनमें प्राकृतिक या कृत्रिम, स्थाई या अस्थाई जल वर्ष भर रहता है। यहां का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है और आर्द्रता रहती है। यह एक पारिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) होता है, जिसमें दलदल, मैंग्रोव, झीलें और धान के खेत शामिल हैं। ये पानी को साफ करते हैं और भूजल को रिचार्ज करते हैं।

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