UP News: आय से अधिक संपत्ति के दोषी पाए गए जेलर अजय कुमार राय, विजिलेंस ने दर्ज किया मुकदमा
यूपी के जौनपुर जेल में तैनात जेलर अजय कुमार राय आय से अधिक संपत्ति जुटाने के दोषी पाए गए हैं। विजिलेंस जांच में सामने आया कि निर्धारित अवधि में उनकी कुल आय 12.51 लाख रुपये थी जबकि उन्होंने 19.42 लाख रुपये खर्च किए। वह अपनी आय से अधिक खर्च किए गए 6.91 लाख रुपये को लेकर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच में जेलर अजय कुमार राय आय से अधिक संपत्ति जुटाने के दोषी पाए गए हैं। वह वर्तमान में जौनपुर जेल में तैनात हैं। विजिलेंस ने आरोपित जेलर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज की है। वह मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं।
शासन ने लखनऊ जेल के तत्कालीन जेलर अजय राय के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायत पर अप्रैल 2023 में विजिलेंस जांच का आदेश दिया था। विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर की टीम ने जांच के लिए निर्धारित अवधि के दौरान अजय राय की आय व व्यय की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि निर्धारित अवधि में उनकी कुल आय 12.51 लाख रुपये थी।
जबकि इस अवधि में उन्होंने अपने व परिवार के भरण-पोषण व संपत्तियां जुटाने में कुल 19.42 लाख रुपये खर्च किए। वह अपनी आय से अधिक खर्च किए गए 6.91 लाख रुपये को लेकर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। शासन के निर्देश पर विजिलेंस ने एफआइआर दर्ज कर विवेचना शुरू की है। कारागार विभाग उनके विरुद्ध जल्द कार्रवाई कर सकता है।
होम्योपैथिक बोर्ड के अधिकारियों ने 45 जिलों में किया छात्रवृत्ति का घपला
उप्र होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के संस्थानों में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के 47.64 करोड़ रुपये के घपले के तार 45 जिलों से जुड़े थे। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की जांच में होम्योपैथिक बोर्ड के तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक/कार्यवाहक रजिस्ट्रार विनोद कुमार यादव, महिला लिपिक व स्कूल प्रबंधक समेत समेत छह आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। छात्रों का सत्यापन करने वाले विभाग के अधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की तैयारी है।
ईओडब्ल्यू ने मामले में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी है, जिसका परीक्षण कराया जा रहा है। उप्र होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड व उससे संबद्ध कालेजों में छात्रवृत्ति की रकम हड़पे जाने का मामला लगभग दो वर्ष पहले पकड़ा गया था। मामले में 30 जुलाई, 2022 को लखनऊ के वजीरगंज थाने में गबन व धोखाधड़ी का मुकदमा हुआ था। कुछ माह बाद शासन ने मामले की जांच ईओडब्ल्यू की सौंप दी थी।
पड़ताल में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 व 2021-22 में निजी शिक्षण संस्थान में संचालित डिप्लोमा इन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट (डीएचपी) पाठ्यक्रम में दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत 45 जिलों में होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के तत्कालीन रजिस्ट्रार, अन्य कर्मियों से शिक्षण संस्थाओं से मिलीभगत कर आयुष विभाग के नियमों का उल्लघंन किया गया।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेजों का भी हुआ। जांच में तत्कालीन कार्यवाहक रजिस्ट्रार विनोद कुमार यादव, संविदा लिपिक दिनेश चंद्र दुबे व सुषमा मिश्रा ने बिना मान्यता प्राप्त डीएचपी कालेज के प्रबंधक अमर बहादुर गौतम से मिलीभगत कर छात्रों का इनरोलमेंट किए बिना ही कालेजों का डाटा समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से लाक कराया था।
सत्र 2019-20 व 2020-21 का डाटा संविदा बाबू दिनेश दुबे ने लखनऊ की कंपनी यूबिक मार्केटिंग के माध्यम से लाक कराया था। बिना बोर्ड की सहमति के प्रबंधक अमर बहादुर ने अंबेडकरनगर से व्यक्तिगत डिजिटज हस्ताक्षर के जरिए सरकारी धन हड़पा। घपले के लिए कालेजों की कूटरचित मान्यता का भी प्रयोग किया गया।
घपल में बलिया के आशा सिंह होम्योपैथिक फार्मेसी कालेज के प्रबंधक अंगद सिंह, बलिया के ही मां लक्ष्मी रामा होम्योपैथिक फार्मेसी कालेज के प्रबंधक रविंद्र नाथ सिंह, गाजीपुर के दन सन शाइन कालेज आफ एजुकेशन के निदेशक दिनेश सिंह यादव की भूमिका भी सामने आई। ईओडब्ल्यू आरोपित दिनेश चंद्र दुबे, सुषमा मिश्रा, विनोद कुमार यादव, अमर बहादुर, अंगद कुमार सिंह व रविंद्र नाथ सिंह के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। दिनेश सिंह यादव समेत अन्य आरोपितों के विरुद्ध जांच चल रही है।
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