नवंबर से अभी तक पूरी नहीं हुई आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले की जांच
Land Acquisition Compensation Scam: राजस्व अधिकारियों ने लखनऊ के सरोसा-भरोसा गांव की भूमि के गाटा संख्या-तीन की 68 बीघा, 11 बिस्वा और 11 बिस्वांसी भूम ...और पढ़ें

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊः आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच एक माह बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने घोटाले की जांच को लेकर लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी को पत्र लिखा है। परिषद के अध्यक्ष ने नवंबर में जिलाधिकारी को घोटाले की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे परियोजना पर वर्ष 2013 में काम शुरू किया गया था। तत्कालीन मुख्य सचिव ने 13 मई 2013 को एक्सप्रेसवे के लिए लखनऊ, आगरा, इटावा, औरैया, कन्नौज, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कानपुर नगर, उन्नाव व हरदोई के जिलाधिकारियों को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण के लिए तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल व अन्य राजस्व अधिकारियों की टीमें बनाई गई थीं। उसी समय एक्सप्रेसवे की संरेखण (एलाइनमेंट) भी जारी कर दी गई थी। राजस्व अधिकारियों ने लखनऊ के सरोसा-भरोसा गांव की भूमि के गाटा संख्या-तीन की 68 बीघा, 11 बिस्वा और 11 बिस्वांसी भूमि के करीब दो बीघा हिस्से पर अनुसूचित जाति के भाई लाल व बनवारी लाल को वर्ष 2007 से पहले से काबिज दिखा कर 1,09,86,415 रुपये का मुआवजा जारी कर दिया था।
तत्कालीन लेखपाल ने बिना जांच के लाभार्थी और उसके पड़ोसी के बयान के आधार पर उक्त भूमि पर कास्तकार के रूप में लाभार्थियों का कब्जा दिखाया और रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि लाभार्थी अनुसूचित जाति का है। उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम-1950 की धारा 122 बी (4 एफ) के तहत लाभार्थी को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
इसी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और एसडीएम ने भी लाभार्थी को कास्तकार मान कर मुआवजे का राशि जारी कर दी थी। राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने इस मामले की जांच लखनऊ के जिलाधिकारी को सौंपी थी। अभी तक घोटाले की जांच पूरी न होने के बारे में जिलाधिकारी कहना है कि एसडीएम को जांच सौंपी जा चुकी है।

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