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    यूपी सरकार का खजाना भरने वाला GST विभाग ही बेहाल, छह साल से ढूंढ रहा अपनी जमीन

    By Rafiya NazEdited By:
    Updated: Thu, 10 Dec 2020 01:11 PM (IST)

    बीते छह वर्ष से लखनऊ में जीएसटी अफसर जमीन के लिए कागजी घोडे़ दौड़ा रहे हैं लेकिन अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ। मीराबाई मार्ग स्थित जीएसटी भवन के बाहर ख ...और पढ़ें

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    लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित जीएसटी भवन के बाहर खडे़ कर देते हैं पकड़े हुए वाहन।

    लखनऊ, जेएनएन। ये उस महकमे का हाल है जो सरकार को राजस्व देने में टॉप पर है, जिन वाहनों से राजस्व वसूली कर खजाना भरा जाता है उन्हें खड़ा करने के लिए विभाग के पास जगह तक नहीं है। लिहाजा पकड़कर लाए वाहनों को सड़क पर ही खड़ा कर देते हैं। कोहरे के मौसम में सड़क पर खड़े इन वाहनों की चपेट में कब कौन आ जाए इन्हें सरोकार नहीं। हाल यह है कि बीते छह वर्ष से जीएसटी अफसर जमीन के लिए कागजी घोडे़ दौड़ा रहे हैं लेकिन अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ। बात मीराबाई मार्ग स्थित जीएसटी भवन के बाहर खडे़ वाहनों की है।

    पड़ताल के लिए संकरी गली के मोड़ पर राजस्व वसूली के लिए लाए गए दोनों ओर बड़े-बड़े ट्रक  लाकर खडे़ कर दिए गए हैं। विभागीय अधिकारी कागजों की जांच कर रहे हैं। इनकी जांच पूरी होने के बाद ट्रक कब हटेंगे इसे बताने वाला कोई नहीं? अधिकारी कहते हैं कि स्थान के लिए कई बार लिखा-पढ़ी की जा चुकी है लेकिन अभी तक राजस्व चोरी में पकड़ कर लाई गई गाड़ियों के लिए जगह नहीं? मिल सकी है।

    यातायात पुलिस कार्रवाई करती है न परिवहन विभाग

    यूं तो शहर की सड़कों पर खड़ी आमजनों की गाड़ियों को चंद मिनटों में ही यातायात पुलिस टांग ले जाती है लेकिन संकरे और वीआईपी गेस्ट हाउस के मोड़ पर खडे़ इन वाहनों पर कार्रवाई करने में उसकी दिलचस्पी नहीं होती है। जरा सोचिए जब मीराबाई मार्ग के वीआईपी गेस्ट हाउस के पास यह नजारा है तो शहर के यातायात की तस्वीर का क्या हाल होगा? आरटीओ की टीम भी इस पर मौन रहती है। सिर्फ यही नहीं डालीबाग मुख्य मार्ग के बहुखंडीय भवन के पास भी ऐसे वाहनों का जमावड़ा कोहरे के दिनों में लग रहता है। लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है।

    एडिशनल कमिश्नर जीएसटी दिलीप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि किराए पर जमीन लेने को लेकर कवायद जारी है। पूर्व के अधिकारियों ने भी इस दिशा में उच्चाधिकारियों को राजस्व चोरी कर पकड़कर लाए जाने वाले वाहनों को खड़ा करे के लिए लिखा-पढ़ी की है। लेकिन बीते तकरीबन छह वर्षों से जमीन किराए पर लेने का मसला हल नहीं हो सका है। बड़ी मुश्किल से एक जगह स्थान देखा भी गया तो वह भी हाथ से निकल गया। जो स्थान है वह पर्याप्त नहीं है। लिखा-पढ़ी बराबर की जा रही है।