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    34 करोड़ के प्रोजेक्ट को हरी झंडी, लखनऊ के 17000 परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा; मगर यहां फंसा पेंच

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 05:05 PM (IST)

    लखनऊ के गोमती नगर में दो नए बिजली उपकेंद्रों के निर्माण को लेकर समय सीमा पर बहस जारी है। कुछ इंजीनियरों का दावा है कि जून 2026 तक उपभोक्ताओं को लाभ मि ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। गोमती नगर में दो नए बिजली उपकेंद्र का लाभ आगामी जून 2026 तक उपभोक्ताओं को मिल पाएगा या फिर दीपावली तक यह सुविधा मिलेगी। इसको लेकर लेसा के अभियंताओं का अलग अलग तर्क है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के काबिल अभियंताओं का दावा है कि जून माह में गोमती नगर में बिजली संकट काे दूर कर दिया जाएगा।

    जून 2026 मे विशेष खंड व विनम्र खंड में बनने वाले दोनों उपकेंद्र बन जाएंगे और उपभोक्ताओं को बिजली का लाभ मिलने लगेगा। वहीं बिजली विभाग के कुछ अभियंताओं का कहना है कि सिविल वर्क में ही पांच माह कम से कम लग जाएंगे। क्योंकि निर्माण कार्य ठंड के समय धीमा होता है और सीमेंट को मजबूत होने में समय चाहिए होता है।

    ऐसे में पांच माह में सब कुछ करना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके अलावा बिजली विभाग के यार्ड में नए पावर ट्रांसफार्मर को लगाना, नई लाइन ट्रांसमिशन उपकेंद्र से लाकर जोड़ना और फिर उपभोक्ताओं को बिजली देने के लिए लोड का विभाजन जैसे दर्जनों छोटे व बड़े काम करना इतने कम समय में मुश्किल होगा।

    बता दें कि वर्ष 2018 से मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड लखनऊ विकास प्राधिकरण से दो नए बिजली उपकेंद्र की जमीन मांग रहा था। एलडीए न हां कह रहा था और न मना कर रहा था। अब जमीन तो मिल गई है लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

    अभियंताओं के मुताबिक दो बिजली उपकेंद्र को बनाने में करीब पौने तीन करोड़ का खर्च आएगा। इसके अलावा 31 करोड़ से अधिक का खर्च बिजली उपकेंद्र में पैनल, पावर ट्रांसफार्मर सहित अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में खर्च होगा। इन कामों को तभी किया जा सकेगा जब सिविल का अधिकांश काम हो चुका होगा। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि पांच माह में
    क्या बिजली उपकेंद्र बनाकर उपभोक्ताओं को बिजली दी जा सकेगी?

    यहां के उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
    अभियंताओं के मुताबिक नए बिजली उपकेंद्र बनने से विभूति खंड, मंत्री आवास, विराज खंड स्थित बिजली उपकेंद्र का लोड विभाजित हो सकेगा। आने वाले समय में यहां पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता को बढ़ाया भी जा सकेगा और पंद्रह से सत्रह हजार उपभाेक्ता को लाभ मिलेगा।