विशेष सचिव ईशा प्रिया पर उत्पीड़न करने और गालियां देने का आरोप, काम करने को तैयार नहीं कर्मी
UP News: प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि विशेष सचिव उन्हें रोजाना पर्यटन निदेशालय बुलाकर उनका उत्पीड़न करती हैं। कर्मचारि ...और पढ़ें

विशेष सचिव पर्यटन विभाग ईशा प्रिया
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊः पर्यटन विभाग के कर्मचारियों ने विशेष सचिव ईशा प्रिया पर उत्पीड़न और गालियां देने का आरोप लगाया है। विशेष सचिव पर्यटन विभाग ईशा प्रिया के पास प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का अतिरिक्त चार्ज भी है।
इस संदर्भ में प्रमुख सचिव अमृत अभिजात को लिखे पत्र में सात कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि विशेष सचिव पिछले कई माह से उनका उत्पीड़न कर रही हैं। पर्यटन विभाग व सरकार की जनहितकारी योजनाओं के क्रिन्यावयन के लिए अभी तक वे उत्पीड़न बर्दाश्त कर रहे थे, लेकिन अब पर्यटन विभाग में काम करना शारीरिक व नैतिक रूप से संभव नहीं है। मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी मामला लाया जा रहा है। इस बारे में विशेष सचिव ईशा प्रिया ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं इस बारे में पर्यटन विभाग के महानिदेशक राजेश कुमार का कहना है कि वह चित्रकूट में हैं, उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।
प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि विशेष सचिव उन्हें रोजाना पर्यटन निदेशालय बुलाकर उनका उत्पीड़न करती हैं। कर्मचारियों ने यह आरोप भी लगाया कि विशेष सचिव कई मौकों पर गंदी गालियां देती हैं। विरोध करने पर प्रतिकूल प्रविष्टि की धमकी देती हैं, इसलिए पर्यटन विभाग का कोई भी कर्मचारी इन परिस्थितियों में यहां काम करने का इच्छुक नहीं है।
आरोप है कि वहां निदेशालय के अन्य कर्मचारियों के सामने ही सचिवालय के अधिकारियों के साथ अत्यंत खराब और अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि विशेष सचिव कई अवसरों पर अधिकारियों को गंदी गालियां भी देती हैंऔर प्रतिकूल प्रविष्टि देने की धमकी देकर डराती-धमकाती हैं।
सचिवालय संघ के समर्थन के साथ लिखे गए इस पत्र में मांग की गई है कि पर्यटन विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को तत्काल उनके मूल विभाग यानी सचिवालय प्रशासन विभाग में भेजा जाए। कर्मचारियों का कहना है कि अपमानजनक परिस्थितियों में यहां कार्य करने के बिल्कुल भी इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने अनुरोध किया है कि उनके स्थान पर ऐसे अधिकारियों को तैनात किया जाए जो इतना अपमान सहने में सक्षम हों।
पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव (सचिवालय प्रशासन) और अध्यक्ष (उत्तर प्रदेश सचिवालय संघ) को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी गई है। इस सामूहिक प्रत्यावेदन पर विभाग के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों ने 3 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर कर अपनी एकजुटता दिखाई है। लखनऊ के प्रशासनिक गलियारों में इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद खलबली मची है।

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