Lucknow News : केजीएमयू से बर्खास्त डॉ. एक सचान के खिलाफ ईडी ने तैयार की थी पांच हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट
KGMU Lucknow Sacked Senior Doctor AK Sachan डॉ. सचान के खिलाफ ईडी के साथ ही विजिलेंज जांच भी चल रही है। डॉ. सचान केजीएमयू में नौकरी में रहने के बावजूद इंदिरानगर में शेखर हास्पिटल में प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने वर्ष 2019 में पद से इस्तीफा दिया था।

जागरण संवाददाता, लखनऊ : केजीएमयू से बर्खास्त डॉ. आमोद कुमार सचान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सरकारी नौकरी में रहते निजी संस्थानों से करोड़ों की कमाई के मामले में पिछले वर्ष शिकंजा कसा था।
केजीएमयू के फार्माकोलाजी विभाग पूर्व अध्यक्ष और शेखर अस्पताल के प्रबंध निदेशक रहे डॉ. आमोद कुमार सचान के बैंक खातों से 45 करोड़ से अधिक के लेन-देन भी सामने आए थे। ईडी ने विजिलेंस, स्वास्थ्य विभाग और केजीएमयू को सुबूत के साथ 5,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट भेजी थी।
डॉ. सचान के खिलाफ ईडी के साथ ही विजिलेंज जांच भी चल रही है। डॉ. सचान केजीएमयू में नौकरी में रहने के बावजूद इंदिरानगर में शेखर हास्पिटल में प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने वर्ष 2019 में पद से इस्तीफा दिया था।
पूर्व पत्नी डॉ. ऋचा मिश्रा और बेटा केश कली सचान भी रहे निदेशक
शेखर हास्पिटल में उनकी पूर्व पत्नी डॉ. ऋचा मिश्रा और बेटा केश कली सचान भी बतौर निदेशक रहे। जांच में यह भी सामने आया कि इस्तीफे के बाद भी डॉ. सचान शेखर हास्पिटल के अलावा बाराबंकी के सफेदाबाद, शाहजहांपुर के हीरपुर में हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के नाम से कालेज का संचालन कर रहे हैं।
मैसर्स बालाजी चैरिटेबल ट्रस्ट के भी स्वामी
इंस्टीट्यूट हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वामित्व में हैं। इसके ट्रस्टी डॉ. सचान और उनकी पत्नी डॉ. ऋचा थीं। इसके अलावा मैसर्स बालाजी चैरिटेबल ट्रस्ट है। इसके जरिए वह शेखर स्कूल आफ नर्सिंग चला रहे हैं, जो शेखर अस्पताल में ही है।
छापे में मिले थे करोड़ों रुपये
आयकर विभाग ने वर्ष 2013 में डॉ. एके सचान व ऋचा मिश्रा के ठिकानों शेखर हास्पिटल, श्री बालाजी चैरिटेबल ट्रस्ट और मेसर्स हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। डा. एके सचान के आवासीय परिसर व कार्यालय कक्ष से 1.76 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। छापेमारी के दौरान डॉ. सचान के कई बैंक खातों के बारे में भी जानकारी मिली थी।
झूठा, निराधार और मनगढ़ंत आरोप
डॉ.सचान ने कहा कि मुझ पर झूठा, निराधार और मनगढ़ंत आरोप है। विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से केवल प्रतिष्ठा को धूमिल करने और मेरी व्यक्तिगत एवं पेशेवर गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। इस प्रकार की मनगढ़ंत शिकायत का निस्तारण मेरी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले किया जाना स्पष्ट दर्शाता है कि यह कृत्य एक दूषित मानसिकता और दुर्भावनापूर्ण इरादों से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य केवल मुझे बदनाम करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। केजीएमयू से मेरा जुड़ाव हमेशा शिक्षण और सेवा के प्रति गहरी निष्ठा पर आधारित रहा है। मैंने फार्माकोलाजी विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है और अपने कार्यकाल के दौरान अनेक नवाचारी एवं प्रभावशाली पहलें शुरू कीं। मेरा कार्यकाल पूर्णतः निष्कलंक और विवादरहित रहा है।
नजीर बनेगी डॉ. एके सचान पर की गई कार्रवाई
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि कोर्ट के आदेश के क्रम में इमरजेंसी कार्यपरिषद की बैठकें बुलाई गई। डॉ.सचान पर आरोप सही पाए गए। उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई भविष्य में नजीर बनेगी। केजीएमयू में पहली बार प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। कुलपति का दावा है कि प्राइवेट प्रैक्टिस की शिकायत मिलने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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