एचपीवी वैक्सीन से सुरक्षित हो सकती है आपकी बेटी, बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के केस
Cervical Cancer Awareness Month: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन लगवाकर बेटियों को इस जानलेवा कैंसर से सुरक्षित किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर ...और पढ़ें

सर्वाइकल कैंसर जागरुकता माह
जागरण संवाददाता, लखनऊ : सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे गंभीर संक्रमण है, लेकिन यह पूरी तरह से रोका जा सकता है। एचपीवी से फैलने वाला यह संक्रमण किसी एक उम्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर बचाव न होने पर कभी भी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन लगवाकर बेटियों को इस जानलेवा कैंसर से सुरक्षित किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से एचपीवी संक्रमण के कारण होता है। इसके करीब 90 प्रतिशत मामलों की वजह एचपीवी संक्रमण है।
स्वास्थ्य से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हर साल सर्वाइकल कैंसर के 10,825 नए मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन मामलों में से करीब 4,000 से 4,800 महिलाओं की मौत हर साल सिर्फ इसलिए हो जाती है, क्योंकि उन्हें इसके कारण का पता देर से चलता है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में जांच और जागरुकता की कमी इस स्थिति को और गंभीर बना देती है।
सर्वाइकल कैंसर जागरुकता माह के अवसर पर संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान के मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग की प्रो. इंदु लता साहू कहती हैं कि अगर समय रहते एचपीवी वैक्सीन लगवाया जाए, साथ में नियमित जांच को बढ़ावा दिया जाए तो सर्वाइकल कैंसर से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है। आज जरूरत है कि माता-पिता आगे आएं और बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एचपीवी वैक्सीन को प्राथमिकता दें।
किस उम्र में लग सकती है एचपीवी वैक्सीन
- नौ से 14 वर्ष की उम्र में एचपीवी वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है
- 15 वर्ष से अधिक उम्र की किशोरियां और महिलाएं भी डाक्टर की सलाह से वैक्सीन लगवा सकती हैं
- यौन संक्रमण से पहले वैक्सीन लगने पर सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा की संभावना सबसे अधिक होती है।
समय पर जांच से बच सकती है जान
प्रो. अमृता गुप्ता के मुताबिक 25 वर्ष की उम्र से सर्वाइकल कैंसर की जांच शुरू करनी चाहिए। 25 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर पांच साल में एचपीवी टेस्ट या एचपीवी के साथ पैप टेस्ट कराना चाहिए। नियमित जांच से बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, जिससे इलाज आसान और सफल हो जाता है।
बचाव के उपाय
- एचपीवी वैक्सीन लगवाना
- नियमित जांच कराना
- धूमपान से बचना
- सुरक्षित यौन संबंध बनाना
- संक्रमण के प्रति जागरूक रहना।

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