Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    टाइगर रिजर्व में फेंसिंग पर सवाल, सीईसी ने लगाया ब्रेक; वैज्ञानिक अध्ययन का आदेश

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 08:07 AM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने टाइगर रिजर्व में फेंसिंग पर सख्त रुख अपनाया है। समिति ने मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के नाम ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। टाइगर रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्रों में की जा रही चेन-लिंक व सोलर फेंसिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने सख्त रुख अपनाया है। समिति ने स्पष्ट कहा है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के नाम पर उठाए जा रहे कदम अगर वैज्ञानिक और विधिक कसौटियों पर खरे नहीं उतरे तो वे संरक्षण की जगह संकट बन सकते हैं।

    समिति ने फेंसिंग के पारिस्थितिक प्रभाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर इसकी प्रभावशीलता का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराने के लिए मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। यह अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा कराया जाएगा। अध्ययन रिपोर्ट छह माह के भीतर सीईसी को सौंपी जाएगी।

    सीईसी ने माना है कि प्रदेश सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए कदम उठा सकती है, लेकिन ऐसे सभी कार्य अत्यधिक सावधानी, वैज्ञानिक आकलन और विधिक प्रविधानों के अनुरूप होने चाहिए, ताकि वन्यजीव आवास, पारिस्थितिक संपर्क और प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित न हो।

    सीईसी के पास आई शिकायत में कहा गया है कि वन विभाग द्वारा दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में बिना समुचित पारिस्थितिक अध्ययन के बड़े पैमाने पर फेंसिंग कराई जा रही है।

    इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, जैव विविधता अधिनियम 2002 तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया है। यह भी कहा गया कि दो वित्तीय वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आपदा शमन निधि के नाम पर खर्च की गई, जो मनमानी और वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करती है।

    प्रदेश में चार टाइगर रिजर्व हैं इनमें दुधवा, पीलीभीत, अमानगढ़ और रानीपुर हैं। बाघों की संख्या वर्ष 2014 में 117 थी जो 2022 में बढ़कर 205 हो गई है। तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। सरकार फेंसिंग उन संवेदनशील हिस्सों में कर रही की गई है, जहां मानव बस्तियों के पास टकराव की आशंका अधिक है।

    सीईसी ने कहा कि फेंसिंग का डिजाइन ऐसा हो, जिससे यदि कोई वन्यजीव बाहर निकल जाए तो उसे सुरक्षित तरीके से वापस जंगल में भेजा जा सके। चूंकि प्रदेश में तेंदुआ मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा कारण है, इसलिए फेंसिंग “लेपर्ड-प्रूफ” बनाया जाए।

    सीईसी ने फेंसिंग परियोजना की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की सिफारिश की है। सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी मनोज सिंह की अध्यक्षता में गठित होने वाली इस समिति में सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी ममता संजीव दुबे सह-अध्यक्ष होंगी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा नामित सहायक महानिरीक्षक वन इसके सदस्य होंगे। यह समिति फेंसिंग योजना के क्रियान्वयन और पारिस्थितिक प्रभावों की समीक्षा कर सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट देगी।

    कहां कितनी हुई फेंसिंग

    • दुधवा टाइगर रिजर्व-76 किलोमीटर
    • पीलीभीत टाइगर रिजर्व-67 किलोमीटर
    • कतर्नियाघाट-90 किलोमीटर
    • सुहेलवा-21.5 किलाेमीटर
    • बिजनौर-10 किलोमीटर
    • नजीबाबाद-05 किलोमीटर