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    Chhapak Movie: 'छपाक' की लक्ष्मी से क्या है कानपुर का कनेक्शन, कैसे आया ये फिल्म बनाने का ख्याल

    By AbhishekEdited By:
    Updated: Sat, 11 Jan 2020 07:07 AM (IST)

    Chhapak Movie कल्याणपुर के आलोक दीक्षित ने स्टॉप एसिड अटैक अभियान शुरू कर बिना पहचान पत्र के तेजाब बिक्री पर लगवा दी थी रोक। ...और पढ़ें

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    Chhapak Movie: 'छपाक' की लक्ष्मी से क्या है कानपुर का कनेक्शन, कैसे आया ये फिल्म बनाने का ख्याल

    कानपुर, [अम्बर वाजपेयी]। रुपहले पर्दे पर आज रिलीज हो रही फिल्म 'छपाक' की रियल स्टोरी कानपुर की छांव में पली बढ़ी है। छपाक की लक्ष्मी को कानपुर के आलोक दीक्षित के छांव फाउंडेशन का साथ मिला था। यह वह फाउंडेशन है, जिसने दिल्ली में 'स्टॉप एडिस अटैक' अभियान शुरू किया था और बिना पहचान पत्र के एसिड की बिक्री बंद करा दी थी। मेघना गुलजार निर्देशित इस फिल्म की कहानी एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल और छांव फाउंडेशन के 'स्टॉप एसिड अटैक' मूवमेंट पर आधारित है। वर्ष 2013 में कानपुर के कल्याणपुर निवासी आलोक दीक्षित ने इसे शुरू किया था।

    लक्ष्मी व आलोक की है एक बेटी

    फिल्म में लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार दीपिका पादुकोण निभा रही हैं तो अमोल नाम से आलोक का किरदार विक्रांत मैसी। इसमें दिखाया गया है कि कैसे 16 साल की लक्ष्मी अग्रवाल एसिड अटैक की शिकार होती है और छांव फाउंडेशन के सहयोग से लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दोषियों को सजा दिलाती है। कई साल तक रिश्ते में रहे आलोक और लक्ष्मी की एक बेटी भी है, जिसका नाम पीहू है।

    2015 में निर्देशक मेघना गुलजार ने किया था संपर्क

    मुंबई में आयोजित फिल्म के प्रीमियर में भाग लेने गए आलोक दीक्षित ने फोन पर दैनिक जागरण से हुई विशेष बातचीत में बताया कि 'स्टॉप एसिड अटैक' मूवमेंट की जानकारी के बाद मेघना जी इस पर फिल्म बनाना चाहती थीं। 2015 में उन्होंने मुझसे संपर्क किया। कैंपेन के वीडियो-फोटो मांगे और 2018 में फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई। शूटिंग के दौरान मैं काफी समय तक मुंबई में रहा। सच्चाई बताने के लिए मेघना जी ने बहुत मेहनत की। मेरा किरदार पर्दे पर उतारने के लिए विक्रांत मैसी ने 11 किलो वजन बढ़ाया और दाढ़ी रखी।

    छोड़ दी थी एयरफोर्स की नौकरी

    कल्याणपुर के मुखर्जी विहार डा. संत कुमार दीक्षित और रूपम दीक्षित के पुत्र आलोक दीक्षित चार जुलाई 1988 को पैदा हुए थे। कानपुर के वीएसएसडी कॉलेज से स्नातक करने के बाद दो साल एयरफोर्स में रहे। मन नहीं लगा तो इस्तीफा दे दिया। फिर बेंगलुरु से पत्रकारिता की।

    एसिड अटैक सर्वाइवर भी फिल्म का हिस्सा

    एसिड अटैक सर्वाइवर के लिए छांव फाउंडेशन की मदद से लखनऊ और आगरा में शीरोज हैंगआउट कैफे खोले गए हैं। इनके संचालन की जिम्मेदारी एसिड अटैक सर्वाइवर पर ही है। फिल्म में लखनऊ कैफे में काम करने वाली जीतू-कुंती और आगरा कैफे की रितु-बाला भी अदाकारी करती नजर आएंगी।