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राज्यसभा से भाजपा का सियासी संदेश, ब्राह्मण-ओबीसी संग पिछड़ों को साधकर सपा के PDA को दी चुनौती

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:06 PM (IST)

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने कानपुर-बुंदेलखंड से प्रकाश पाल और गोपी कृष्ण पांडेय को प्रत्याशी बनाकर ब्राह्मण, ओबीसी और पिछड़े ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भाजपा ने राज्यसभा नामांकन से कानपुर-बुंदेलखंड में सामाजिक समीकरण साधा

  2. प्रकाश पाल (ओबीसी) और गोपी कृष्ण पांडेय (ब्राह्मण) को प्रत्याशी बनाया

  3. यह रणनीति सपा के पीडीए को चुनौती, 2027 चुनाव के लिए

जागरण संवाददाता, कानपुर। राज्यसभा चुनाव में दो चेहरों के चयन के बहाने भाजपा ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों के सामाजिक समीकरण को साधने की रणनीति पर बड़ा दांव चला है। 10 सीटों के लिए नामांकन के आखिरी दिन सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे जाने से मतदान की नौबत नहीं आएगी।

भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय हो चुका है। भाजपा ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल और वरिष्ठ कार्यकर्ता गोपी कृष्ण पांडेय को प्रत्याशी बनाकर संगठन के साथ सामाजिक समीकरण को भी साधने का संदेश दिया है।

प्रकाश पाल ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि गोपी कृष्ण पांडेय के जरिए ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश मानी जा रही है। वहीं बरेली की श्रुति गंगवार का कानपुर कनेक्शन भी इस समीकरण को विस्तार देता है।

श्रुति गंगवार की ससुराल घाटमपुर क्षेत्र के टिकवापुर गांव में है। इस तरह राज्यसभा के बहाने भाजपा ने ब्राह्मण, ओबीसी और पिछड़े वर्ग को एक साथ साधने का प्रयास किया है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को कमजोर करना है।

इसके लिए पार्टी लगातार पिछड़े वर्ग के नेताओं को संगठन और सरकार में प्रतिनिधित्व दे रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है।

भाजपा सरकार में हिस्सेदारी के साथ ही संगठनात्मक नियुक्तियों के जरिये इस सामाजिक आधार को और व्यापक करने में जुटी है। प्रदेश भाजपा की टीम में 42 अलग-अलग जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

भाजपा के लिए यह कवायद 2027 के चुनाव में केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति भी है। राज्यसभा के बहाने दिया गया संदेश अब संगठन और विधानसभा चुनाव की तैयारियों में कितना असर दिखाता है, इसका परीक्षण 2027 में होगा।

बोले क्षेत्रीय अध्यक्ष...

जिले से पहली बार दो पदाधिकारियों को एक साथ राज्यसभा भेजा गया है। यह खुशी की बात है। संगठन में सभी वर्गों के लोगों को प्रमुख पद दिए जाएंगे। पांच हजार से अधिक वोट बैंक वाली हर जाति को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
रामकिशोर साहू, क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड

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