Kanpur झकरकटी बस अड्डे की बदलेगी तस्वीर, 166 करोड़ से बनेगा 300 मीटर लंबा फ्लाईओवर, रेलवे ब्रिज से मिलेगी कनेक्टिविटी
कानपुर के झकरकटी बस अड्डे (शहीद मेजर सलमान खान) का 166 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा ...और पढ़ें

झकरकट्टी बस अड्डा।
HighLights
झकरकटी बस अड्डे का 166 करोड़ रुपये से पुनर्विकास
300 मीटर लंबा, 10 मीटर चौड़ा फ्लाईओवर बनेगा
पांच मंजिला आधुनिक टर्मिनल, पीपीपी मॉडल पर आधारित
जागरण संवाददाता, कानपुर। झकरकटी बस अड्डे (शहीद मेजर सलमान खान) के पुनर्विकास के लिए प्रारंभिक तैयारियां जमीनी स्तर पर शुरू हो गई हैं। पूर्व में पांच मंजिला इमारत के लिए सात स्थलों पर मिट्टी भार वहन क्षमता की जांच हो चुकी है। अब 300 मीटर लंबे फ्लाईओवर के लिए मिट्टी भार वहन क्षमता की जांच का काम चल रहा है।
छह स्थलों पर 40 फीट गहराई से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। फ्लाईओवर के लिए छह पिलर बनेंगे, जिससे होकर बस अड्डे से निकलकर बसें गंतव्य स्थलों की ओर रवाना हुआ करेंगी। ये फ्लाईओवर बस अड्डे के अंदर से रेलवे ओवर ब्रिज से जुड़ेगा। यह फ्लाईओवर करीब 10 मीटर की चौड़ाई वाला होगा।
बस अड्डा सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी माडल) के तहत अत्याधुनिक और हाईटेक टर्मिनल के रूप में तब्दील होगा। इस परियोजना के तहत बनने वाली पांच मंजिला इमारत की नींव रखने से पहले के कार्य पूरे किए जा रहे हैं। बस अड्डे की प्रस्तावित इमारत का परिसर की मिट्टी कितना भार ले पाएगी, इसके विश्लेषण के लिए दिल्ली की कंपनी आइजीएस (इंडियन जियोटेक्निकल सर्विसेज) को ठेका मिला है।
ये कंपनी बस अड्डे पर फ्लाईओवर बनाने के लिए छह स्थलों से 40 फीट गहराई से मिट्टी के नमूने एकत्र कर रही है। कंपनी के सुपरवाइजर मोहम्मद रजा ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम मिट्टी का परीक्षण कर रही है। यह जांच बस अड्डे परिसर के भीतर अलग-अलग छह चिह्नित स्थानों पर की जा रही है। सैंपल लेने में एक-एक बोर में दो दिन का समय लग रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट प्रयोगशाला से महीने भर में मिल जाएगी। फिर फ्लाईओवर के लिए डिजाइन तैयार होगा। अप्रूवल मिलने पर काम शुरू होगा। बताया जा रहा है कि बस अड्डे की प्रस्तावित पांच मंजिला इमारत के लिए पूर्व में सात स्थलों पर बोर कर सैंपल लिए गए थे। जिसकी रिपोर्ट भी आ चुकी है।
मिट्टी के स्तर, उसकी संरचना, नमी की हो रही जांच
ठेकेदार कंपनी सीगल के अधिकारियों के मुताबिक, बस अड्डे की पांच मंजिला भारी-भरकम व्यावसायिक और यात्री काम्प्लेक्स की सुरक्षा और मजबूती के लिए जमीन की लोड-बेयरिंग क्षमता (वजन सहने की शक्ति) जानना बेहद जरूरी है। इसके लिए हाइड्रोलिक बोरिंग मशीनों के जरिए भूतल से 40 फीट नीचे तक जाकर मिट्टी के स्तर, उसकी संरचना, नमी और भूमिगत जल स्तर की बारीकी से मैपिंग कराई जा रही है। विशेष बात यह है कि मेट्रो स्टेशन के बगल वाले हिस्से और परिसर में मौजूद झील के अंदर की मिट्टी का भी परीक्षण पूरा कर लिया गया है, ताकि भविष्य में नींव धंसने जैसी किसी भी तकनीकी समस्या से बचा जा सके।
