कानपुर की महिलाओं का कमाल! हुनर को बनाया रोजगार, 19 तरह के हर्बल साबुन से खड़ा किया कारोबार
कानपुर के रौतेपुर संबलपुर गांव की चार महिलाओं ने नारी एकता स्वयं सहायता समूह के तहत 19 तरह के हर्बल ...और पढ़ें

रौतेपुर गांव में साबुन बनातीं समूह की महिलाएं। जागरण
HighLights
कानपुर की चार महिलाओं ने शुरू किया हर्बल साबुन कारोबार
नारी एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बना रहीं 19 तरह के साबुन
कौशल प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास से बनीं आत्मनिर्भर, कमा रहीं मुनाफा
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर के रौतेपुर संबलपुर गांव की चार महिलाओं ने हुनर को रोजगार बना लिया। नारी एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ये महिलाएं 19 तरह के साबुन तैयार कर कारोबार खड़ा कर दिया।
कौशल विकास प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास के दम पर कल्याणपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत रौतेपुर संबलपुर की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं। नारी एकता स्वयं सहायता समूह की चार महिलाएं हर्बल साबुन बनाकर न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल रही हैं। समूह हर महीने 400 से अधिक साबुन बेच रहा है, जिससे 20 से 25 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
वर्ष 2023 में गठित नारी एकता स्वयं सहायता समूह में 12 सदस्य हैं। इनमें रामरती, गोल्डी, सोनी और प्रियंका हर्बल साबुन व इत्र बनाने का काम संभाल रही हैं। कच्चे माल की खरीद से लेकर साबुन तैयार करने, पैकिंग और बिक्री तक की पूरी जिम्मेदारी महिलाएं खुद निभाती हैं।
समूह ने अपने उत्पाद का नाम ‘स्किन साफ्ट’ रखा है। इसकी 19 वैरायटी तैयार की जाती हैं, जिनमें गुलाब की खुशबू वाले साबुन की मांग सबसे अधिक है। समूह से साबुन करीब 50 रुपये प्रति साबुक की थोक कीमत पर बेचा जाता है, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग 70 रुपये है। साबुन बनाने का कच्चा माल कानपुर, खुशबू कन्नौज और पैकिंग के रैपर सूरत से मंगाए जाते हैं।
समूह की सदस्य रामरती ने सरकारी कौशल विकास प्रशिक्षण से हस्तनिर्मित साबुन बनाने की तकनीक सीखी। आज वह मास्टर ट्रेनर के रूप में दूसरी महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका कहना है कि सही प्रशिक्षण और अभ्यास से महिलाएं आसानी से स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। साबुन बनाने में गुणवत्ता और पैकिंग का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
समूह की अध्यक्ष गोल्डी बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। सामूहिक रूप से काम करने से उत्पादन और बिक्री दोनों बढ़े हैं। समूह की महिलाएं अब अपने उत्पादों का बाजार और दायरा बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रही हैं। सीमित संसाधनों से शुरू हुई यह पहल साबित कर रही है कि प्रशिक्षण, मेहनत और सामूहिक सहयोग के बल पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं।
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