Women Health News: जंक फूड पसंद है तो सावधान हो जाएं युवतियां, बच्चेदानी में गांठ के साथ और भी खतरे
कानपुर के एक अस्पताल में हुए अध्ययन में पाया गया कि 20 साल तक की युवतियों में फाइब्रॉएड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। असंतुलित जीवनशैली और खानपान के कारण हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे बच्चेदानी में गांठ बनने का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकों ने बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और सही खानपान पर ध्यान देने की सलाह दी है।

अंकुश शुक्ल, जागरण, कानपुर। बच्चेदानी में गांठ यानी फाइब्रॉएड या रसौली की समस्या अब युवतियों में भी तेजी से बढ़ रही है। पहले यह समस्या 35 से 40 वर्ष की महिलाओं में ही देखने को मिलती थी। अब 20 साल की उम्र की युवतियां भी इससे जूझ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात है कि अविवाहित युवतियां भी इसकी चपेट में हैं और उनकी बच्चेदानी कमजोर हो रही है। यह जानकारी अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा-बच्चा अस्पताल की ओपीडी में आईं 20 वर्ष तक की उम्र की 400 युवतियों पर किए गए अध्ययन में सामने आई है।
इनमें से 40 प्रतिशत युवतियों में फाइब्राएड की समस्या पाई गई। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार, असंतुलित जीवन शैली और अनियंत्रित खानपान के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो बच्चेदानी में फाइब्रॉएड यानी रसौली की समस्या बढ़ाते हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में अविवाहित युवतियों में चार किग्रा और उससे अधिक के फाइब्रॉएड (रसौली) से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में हर महीने आठ से 10 युवती और महिलाओं की सर्जरी की जा रही है। वहीं, ओपीडी में हर दिन इस समस्या से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार, फाइब्राएड (रसौली) गर्भाशय का एक ट्यूमर है, जो गर्भाशय की गांठ के रूप में पांच में से एक महिला को होता है। इनका आकार कुछ मिलीमीटर से लेकर कई किलो तक हो सकता है। यह हार्मोन पर निर्भर ट्यूमर है, जो रजोनिवृत्ति के बाद घटता जाता है।
यह समस्या 30 से 40 वर्ष तक की महिलाओं अधिक होती थी। हालांकि वर्तमान में ऐसे मामलों में तेजी आई है। युवतियों में माहवारी जल्दी शुरू होने के कारण, मोटापा, हार्मोन असंतुलन, प्रदूषण एवं तनाव के कारण ट्यूमर के मामले बढ़ रहे हैं। ज्यादातर मामलों में यह गर्भाशय में बिना किसी लक्षण के बढ़ता है। इसका पता अल्ट्रासाउंड जांच से लगाया जाता है।
फाइब्राएड के प्रमुख लक्षण
- माहवारी में लंबे समय तक रक्तस्राव।
- खून की कमी व कमजोरी।
- महावारी के समय पेट में अधिक दर्द।
- बार बार पेशाब आना।
- बांझपन या गर्भपात।
- कब्ज व बढ़ा हुआ पेट।
बचाव के लिए ये करें
- मनमाने तरीके से किसी भी प्रकार की दवा नहीं खाएं।
- एनीमिया के कारण शरीर में होने वाली आयरन की कमी को पूरा करें।
- खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, मोटा अनाज और सलाद का प्रयोग अवश्य करें।
- वजन को नियंत्रित रखें और धूमपान व शराब के सेवन से बचें।
ऐसे खानपान से बढ़ता खतरा
- प्रोसेस्ट मांस खाने से फाइब्राएड विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है।
- बर्गर, पैटीज, पैकेट वाला चिकन या डीप फ्राइड स्नैक्स जैसे समोसे, फ्रेंच फ्राइज भी गर्भाशय में गांठ का खतरा बढ़ाते हैं।
- हाई फैट डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे केक, कुकीज, बिस्कुट, कैंडी, कोल्ड ड्रिंक्स और स्वीटनर युक्त चीजों का सेवन फाइब्राएड का खतरा बढ़ाता है।
- पिज्जा, पास्ता, ब्रेड, बेकरी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाला मैदा या रिफाइंड अनाज के सेवन से भी यह समस्या बढ़ती है।

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