कानपुर, जागरण संवाददाता। कानपुर शहर की सबसे प्राचीन श्री रामलीला सोसाइटी परेड की रामलीला में एक परिवार ऐसा है, जिसके सदस्य चार पीढ़ियों से मंचन कर रहा है। रामलीला के मंचन में मथुरा के चतुर्वेदी परिवार के सदस्य पिछले 40 वर्षों से किरदार निभा रहे हैं। इस बार की रामलीला में परिवार की चार पीढ़ियां शामिल हैं। श्रीराम के व्यक्तित्व से समाज को परिचित कराने वाले कलाकार उत्कृष्ट मंचन के धनी हैं तो उच्च शिक्षा में भी निपुण हैं।

आनलाइन पढ़ाई करते हैं रामलीला के किरदार

प्रभु श्री राम का किरदार निभाते आए और इस बार व्यास पीठ पर विराजमान बृजेश दत्त चतुर्वेदी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हैं। लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अंकुर एमकाम और सीता का किरदार निभाने वाले वंशी बीकाम की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, वीर हनुमान का किरदार निभाने वाले मंगलेश दत्त एमबीए कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि देर रात तक प्रभु की लीलाओं का मंचन करने के बाद ये कलाकार दिन में आनलाइन पढ़ाई कर आधुनिकता के दौर में भी रामलीला के असली महत्व से समाज को परिचित कराने में जुटे हैं।

रामलीला मंडली में शामिल मथुरा का चतुर्वेदी परिवार

मथुरा के श्री चतुर्वेदी रामलीला मंच के संस्थापक और व्यास महाराज महेश दत्त चतुर्वेदी के बेटे सीए बृजेश दत्त चतुर्वेदी ने बताया कि परेड की रामलीला से उनका परिवार शताब्दी वर्ष के दौरान जुड़ा। रामलीला का मंचन करने वाले लगभग 30 सदस्य 100 वर्ष प्राचीन इस मंडली की शोभा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की रामलीला में उनकी चार पीढ़ियां शामिल हैं, जिसमें महेश दत्त चतुर्वेदी के साथ उनके बेटे बृजेश दत्त, अभिषेक और बाल कलाकार श्रीवेश और विराट अहम भूमिका निभा रहे हैं।

मंडली में पुरुष ही निभाते महिलाओं के पात्र

बृजेश दत्त चतुर्वेदी ने बताया कि उनकी मंडली में एक भी महिला कलाकार नहीं है। पुरुष साथी ही महिलाओं के किरदार निभाते हैं। विशाल चतुर्वेदी कौशल्या, सुलोचना और सुंदरी की लीला का मनोहारी मंचन करते हैं। वहीं, श्रीराम का पात्र सूरज, लक्ष्मण का पात्र अंकुर, सीता का वंशी, राजा दशरथ और लंकेश का महंत दिनेश चतुर्वेदी और परशुराम व वीर हनुमान का किरदार मंगलेश दत्त निभाते हैं।

प्रतिदिन करते संवाद का पूर्वाभ्यास

मंडली के कलाकार प्रतिदिन रात में होने वाली लीला के संवाद का पूर्वाभ्यास करते हैं। प्रभु श्रीराम से लगाव के चलते ही मंडली में आठ वर्ष के बालक से लेकर 80 वर्ष तक के वरिष्ठजन जुड़े हैं। मथुरा की शैली में खड़ी भाषा में संवाद का मंचन करने वाले यह कलाकार रामलीला के मंचन को प्रभु की सेवा के रूप में देखते हैं। कलाकारों को प्रतिदिन शृंगार में दो घंटे का समय लगता है।

मर्यादा के दर्शन कराती परेड की रामलीला

व्यास पीठ पर महाराज श्री का साथ देने वाले बृजेश दत्त बताते हैं कि परेड की रामलीला में श्रद्धा और मर्यादा के दर्शन होते हैं। यहां प्रभु की लीलाओं का मंचन किया जाता है, जिससे भक्तों का जुड़ाव होता है और व्यास पीठ से प्रभु की लीलाओं का गुणगान किया जाता है।

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Edited By: Abhishek Agnihotri

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